सोने (Gold) में टेक्निकल स्ट्रेंथ का जलवा
सोने और चांदी के भावों में तेजी का मुख्य कारण उनकी टेक्निकल (Technical) मजबूती है। नुवामा प्रोफेशनल क्लाइंट्स ग्रुप के फॉरेक्स एंड कमोडिटीज हेड अभिलाष कोइक्कारा के मुताबिक, MCX गोल्ड ने ट्रेंडलाइन सपोर्ट (Trendline Support) को सफलतापूर्वक री-टेस्ट किया है, जो इसके पॉजिटिव बायस (Positive Bias) को और मजबूत करता है। ₹160,755 के लेवल को पार करना आगे की मजबूती के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह पहले रेजिस्टेंस (Resistance) का काम कर चुका है। इस तेजी में मोमेंटम (Momentum) साफ दिख रहा है, और जब तक कीमतें वीकली लो (Weekly Low) से ऊपर बनी रहती हैं, तब तक पॉजिटिव ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है।
सपोर्ट और टारगेट पर नजर
MCX गोल्ड के लिए इमीडिएट सपोर्ट (Immediate Support) करीब ₹148,400 के आसपास देखा जा रहा है, जो 30-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (30-day Exponential Moving Average) के करीब है। जानकारों का मानना है कि इस लेवल पर बाइंग इंटरेस्ट (Buying Interest) बढ़ सकता है, जिससे कीमतों को गिरने से रोका जा सकेगा। गोल्ड को ₹175,000 के टारगेट (Target) तक पहुंचने की उम्मीद है। वीकली चार्ट्स पर हायर हाईज (Higher Highs) और हायर लोज़ (Higher Lows) का बनना मौजूदा स्ट्रेंथ की पुष्टि करता है।
चांदी (Silver) में भी दिख रही Resilience
इसी तरह, MCX सिल्वर (MCX Silver) ने भी हालिया गिरावट के बाद अच्छी रिकवरी दिखाई है और की-रिट्रेसमेंट ज़ोन (Key Retracement Zones) का टेस्ट कर रहा है, जो इसके ब्रॉडर अपट्रेंड (Broader Uptrend) को जारी रखने का संकेत देता है। यह पॉजिटिव अंडरलाइंग ट्रेंड (Positive Underlying Trend) बताता है कि गिरावटें स्ट्रैटेजिक बाइंग (Strategic Buying) के मौके दे सकती हैं, बशर्ते पिछले वीकली लोज़ बरकरार रहें। ट्रेडर्स को रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) के लिए स्टॉप-लॉस (Stop-loss) लेवल्स को हालिया वीकली लोज़ के करीब रखने की सलाह दी जाती है।
₹315,000 तक पहुंचने की उम्मीद
इस हफ्ते की मजबूत शुरुआत से बुल्लिश मोमेंटम (Bullish Momentum) की पुष्टि होती है, जिससे कीमतों में और बढ़त की उम्मीदें बढ़ गई हैं। सिल्वर के लिए इमीडिएट सपोर्ट लगभग ₹226,000 के पास है। इस लेवल से नीचे क्लोजिंग (Closing) बुल्लिश सेंटिमेंट (Bullish Sentiment) को कम कर सकती है, लेकिन तब तक, डिप्स (Dips) फ्रेश बाइंग इंटरेस्ट को आकर्षित कर सकते हैं। निकट से मध्यम अवधि में, सिल्वर ₹315,000 के रेजिस्टेंस लेवल को चुनौती दे सकता है।
मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर्स का असर
हालांकि, टेक्निकल चार्ट्स भले ही शानदार तस्वीर पेश कर रहे हों, लेकिन मैक्रोइकॉनॉमिक (Macroeconomic) माहौल को समझना ज़रूरी है। लगातार महंगाई (Inflation) की चिंताएं और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं (Geopolitical Uncertainties) कीमती धातुओं के लिए सेफ-हेवन डिमांड (Safe-haven Demand) को बढ़ा रही हैं। हालांकि, सेंट्रल बैंक्स (Central Banks) का महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ाने का कमिटमेंट एक बड़ा रिस्क है। मार्केट्स U.S. के इकोनॉमिक डेटा, जैसे कि रोज़गार और महंगाई रिपोर्ट पर बारीक नजर रख रहे हैं, क्योंकि इनसे फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की पॉलिसी का अंदाज़ा लग सकता है।
डॉलर और QE का रोल
U.S. डॉलर (U.S. Dollar) का परफॉरमेंस भी एक काउंटर-वेट (Counter-weight) का काम करता है; मज़बूत डॉलर आमतौर पर डॉलर-डिनॉमिनेटेड (Dollar-denominated) कमोडिटीज (Commodities) जैसे सोने को विदेशी खरीदारों के लिए महंगा बनाता है, जिससे डिमांड कम हो सकती है। क्वांटिटेटिव ईज़िंग (Quantitative Easing) जैसी नीतियां करेंसी डीवैल्यूएशन (Currency Devaluation) और रियल इंटरेस्ट रेट्स (Real Interest Rates) को प्रभावित करके परिदृश्य को और जटिल बना सकती हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से सोने को स्टोर ऑफ वैल्यू (Store of Value) के रूप में अधिक आकर्षक बनाकर सपोर्ट कर सकती हैं।
दूसरी कमोडिटीज का प्रदर्शन
कीमती धातुएं अकेले नहीं चल रही हैं। प्लैटिनम (Platinum) ने 2026 की शुरुआत में सप्लाई की कमी और इंडस्ट्रियल डिमांड (Industrial Demand) के चलते $2,900 प्रति औंस से ऊपर ऐतिहासिक ऊंचाई हासिल की है। 2025 में चांदी ने सोने को आउटपरफॉर्म किया था, और 2026 में इंडस्ट्रियल मेटल्स (Industrial Metals) की भी सप्लाई डेफिसिट (Supply Deficits) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट (Infrastructure Investment) के कारण कीमती धातुओं से बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।
ऐतिहासिक मजबूती और सेंट्रल बैंक्स की भूमिका
ऐतिहासिक रूप से, सोना अक्सर बाजार की अनिश्चितता या बढ़ती महंगाई की उम्मीदों के दौरान सपोर्ट पाता रहा है। 2025 में टैरिफ वॉर्स (Tariff Wars) और भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह पैटर्न देखा गया था। सेंट्रल बैंक द्वारा गोल्ड की लगातार बड़ी मात्रा में खरीदारी (Accumulation) भी एक महत्वपूर्ण डिमांड ड्राइवर बनी हुई है, जो सोने की कीमतों को स्ट्रक्चरल सपोर्ट (Structural Support) प्रदान कर रही है।
संभावित जोखिम (Bear Case)
इस अनुकूल टेक्निकल सेटअप और मजबूत डिमांड के बावजूद, कई रिस्क हैं जो सोने और चांदी की अनुमानित रैली को पटरी से उतार सकते हैं। सेंट्रल बैंक्स का आक्रामक रुख, जिसमें लंबी अवधि तक हाई इंटरेस्ट रेट्स (High Interest Rates) या अप्रत्याशित सख्ती शामिल है, सोने की अपील को कम कर सकता है, खासकर यदि महंगाई उम्मीद से जल्दी कम होती है। भू-राजनीतिक तनाव का कम होना, जो वैश्विक स्थिरता के लिए अच्छा है, सेफ-हेवन डिमांड को कम कर देगा। सप्लाई-साइड फैक्टर्स (Supply-side Factors) भी एक काउंटरपॉइंट प्रस्तुत करते हैं; प्रमुख माइनिंग क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ने से बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतें सीमित हो सकती हैं।
शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी और फॉरकास्ट
जनवरी और फरवरी 2026 के अंत में, पैराबोलिक एडवांसेस (Parabolic Advances) के बाद कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई थी, जिसमें चांदी ने एक ही दिन में भारी गिरावट का अनुभव किया और सोना रिकॉर्ड हाई से करेक्ट हुआ। आने वाला चाइनीज लूनर न्यू ईयर (Chinese Lunar New Year) भी पतले मार्केट्स (Thinner Markets) और अप्रत्याशित प्राइस एक्शन (Price Action) का कारण बन सकता है।
आगे क्या? (Outlook)
कुल मिलाकर, कई विश्लेषकों का नज़रिया सावधानी से आशावादी (Cautiously Optimistic) बना हुआ है, और वे आगे भी सोने और चांदी में तेजी की उम्मीद कर रहे हैं, बशर्ते कि महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल बने रहें। कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) 2026 के अंत तक सोने की कीमतों के $5,000-$6,200 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगा रहे हैं, जिसमें अधिक बुलिश परिदृश्यों में लगातार सेंट्रल बैंक बाइंग और भू-राजनीतिक तनावों के कारण और भी ऊंचे टारगेट संभव हैं। चांदी के पूर्वानुमानों में भिन्नता है, कुछ विश्लेषकों का सुझाव है कि 2026 में औसत $56 प्रति औंस के आसपास रह सकता है, जिसमें और भी ऊंचे पीक्स (Peaks) संभव हैं। हालांकि, मार्केट पार्टिसिपेंट्स (Market Participants) इकोनॉमिक डेटा, सेंट्रल बैंक के बयानों और भू-राजनीतिक विकास पर बारीकी से नज़र रखेंगे, जो कीमती धातुओं के कथित मूल्य को तेज़ी से बदल सकते हैं।