फेड की पॉलिसी हावी, कीमती धातुओं को मिल रहा सपोर्ट
बाज़ार में इस वक्त महंगाई (Inflation) को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों (Interest Rates) को लेकर लिए जाने वाले फैसले सबसे ज्यादा मायने रख रहे हैं। इसी वजह से, पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात या अमेरिका-चीन के बीच संभावित बातचीत जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रम फिलहाल सोने और चांदी के भावों पर उतना असर नहीं डाल पा रहे हैं, जितना फेड की नीति का। स्पॉट गोल्ड में 0.5% की तेज़ी आई और यह $4,757.59 प्रति औंस पर पहुँच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर जून डिलीवरी 0.8% बढ़कर $4,768.20 पर था। स्पॉट सिल्वर 0.2% चढ़कर $86.27 प्रति औंस पर पहुँच गया।
क्यों फेड पर है सबकी नज़र?
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में फेडरल रिजर्व से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम है। ज़्यादा तेल की कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका है, जिससे फेड दरों को लंबा खींच सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि फेड जुलाई 2027 से पहले कोई रेट कट नहीं करेगा। यह उम्मीदें डॉलर को मज़बूत कर रही हैं और ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) बढ़ा रही हैं, जो सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं।
चांदी की औद्योगिक मांग बनी सहारा
हाल के दिनों में सिल्वर ईटीएफ (ETF) ने गोल्ड ईटीएफ को पीछे छोड़ा है। इसकी एक बड़ी वजह चांदी की मज़बूत औद्योगिक मांग है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में इसके इस्तेमाल से 2025 में चांदी की मैन्युफैक्चरिंग 700 मिलियन औंस से ज़्यादा होने का अनुमान है। साथ ही, माइन प्रोडक्शन में कमी से 2025 में लगातार पांचवें साल चांदी के बाज़ार में सप्लाई की कमी (Supply Shortage) रहने की उम्मीद है। गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-to-Silver Ratio) का ऊंचा स्तर यह भी बताता है कि चांदी, सोने के मुकाबले सस्ती हो सकती है।
सेंट्रल बैंक की गोल्ड खरीद जारी
वहीं, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक डॉलर से दूरी बनाने और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। 2024 में ग्लोबल गोल्ड मार्केट का मूल्यांकन $291.68 बिलियन था, और 2030 तक इसके $400 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। यह खरीदारी सोने को लगातार सपोर्ट दे रही है।
आगे क्या?
कीमती धातुओं के लिए सबसे बड़ा जोखिम लगातार बनी हुई महंगाई है, जो फेडरल रिजर्व को ऊँची ब्याज दरें बनाए रखने पर मजबूर कर सकती है। हालाँकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि दशक के अंत तक सोना $10,000 और चांदी $300-$500 तक जा सकती है, लेकिन निकट भविष्य में फेड की पॉलिसी ही कीमतें तय करेगी।
