बाजार में आई बड़ी गिरावट (Market Correction Deepens)
पिछले हफ्ते घरेलू सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में ज़बरदस्त गिरावट देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सिल्वर फ्यूचर्स 12.59% लुढ़क कर ₹2.26 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गए। वहीं, गोल्ड 8.82% गिरकर ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। इस सेल-ऑफ ने हफ्ते के मध्य में तेज़ी पकड़ी थी।
सेंट्रल बैंक्स के संकेतों ने बढ़ाई चिंता (Central Bank Signals Curb Easing Hopes)
खासकर यूएस फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ जापान, बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपियन सेंट्रल बैंक जैसे प्रमुख सेंट्रल बैंक्स की पॉलिसी को लेकर मिले संकेतों के बाद कीमतों पर दबाव और बढ़ गया। इन बैंकों ने बढ़ते क्रूड ऑयल कीमतों और इन्फ्लेशनरी प्रेशर (inflationary pressures) पर चिंता जताई है। ऐसे संकेतों का मतलब है कि मोनेटरी ईज़िंग (monetary easing) में देरी हो सकती है, जो गोल्ड और सिल्वर जैसी सेफ-हेवन एसेट्स (safe-haven assets) की डिमांड के लिए नुकसानदायक है।
ग्लोबल गिरावट का असर (Global Declines Mirror Domestic Trends)
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। Comex पर सिल्वर फ्यूचर्स 14.36% घटकर $69.66 प्रति औंस पर आ गए, जबकि गोल्ड फ्यूचर्स 9.6% की गिरावट के साथ $4,574.9 प्रति औंस पर बंद हुए। यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर व्यापक बिकवाली के दबाव को दर्शाती है।
रिकवरी की राह में रोड़े (Headwinds to Recovery)
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में गोल्ड की कीमतें साइडलाइज़ (sideways) रह सकती हैं या थोड़ी और गिर सकती हैं। हालांकि शार्प फॉल के बाद कीमतों में कुछ स्थिरता आनी चाहिए, लेकिन इनमें इंट्रा-डे बड़ी चालें देखने को मिल सकती हैं। मजबूत यूएस डॉलर, जो 99-100 के करीब बना हुआ है, और हाई इंटरेस्ट रेट्स गोल्ड की रिकवरी के लिए चुनौती बने हुए हैं। यूएस फेडरल रिजर्व का शुरुआती रेट कट्स को लेकर हिचकिचाना, साथ ही बढ़ती ऊर्जा लागतों से इन्फ्लेशन कंट्रोल में आ रही मुश्किलें, मोनेटरी ईज़िंग की उम्मीदों को और देर कर रही हैं। इससे एक सेफ हेवन के तौर पर गोल्ड का आकर्षण कम हो रहा है।
अंडरलाइंग डिमांड मजबूत (Underlying Demand Remains Intact)
इन अल्पकालिक दबावों के बावजूद, ग्लोबल सेंट्रल बैंक्स द्वारा गोल्ड खरीदने की अपनी लंबी अवधि की योजनाओं पर कायम रहने की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि मेटल की कुल डिमांड मजबूत बनी हुई है। भू-राजनीतिक (geopolitical) विकास ने कुछ सीमित सपोर्ट प्रदान किया है, जिससे गोल्ड अभी भी डाउनसाइड रिस्क के खिलाफ एक हेज (hedge) के रूप में काम कर रहा है। इसके अलावा, शादियों के मौसम और अक्षय तृतीया जैसे आने वाले त्योहारों से सीजनल डिमांड (seasonal demand) से निकट भविष्य में घरेलू कीमतों को बढ़ावा मिल सकता है।
