क्यों गिरे सोना-चांदी के भाव, जब दुनिया में तनाव?
वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट ने विश्लेषकों को चौंका दिया। दरअसल, सोमवार को अमेरिकी डॉलर (US Dollar) का मजबूत होना और ब्याज दरों (Interest Rates) में और बढ़ोतरी की उम्मीदों ने सेफ-हेवन (Safe-Haven) मांग पर पानी फेर दिया।
COMEX पर कीमतें लुढ़कीं
COMEX पर, सोना (Gold) करीब $4,665.50 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जो 0.3% की गिरावट दर्शाता है। वहीं, चांदी (Silver) 0.53% लुढ़क कर $72.535 प्रति औंस पर आ गई। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब ईरान-अमेरिका (US-Iran) के बीच तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई थी।
विश्लेषकों की राय
Brickwork Ratings के हेड ऑफ रिसर्च, राजीव शरण (Rajeev Sharan) ने इस स्थिति को 'ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट और मॉनेटरी पॉलिसी रीकैलिब्रेशन के बीच एक नाजुक संतुलन' बताया। उन्होंने कहा कि अप्रैल की शुरुआत में भू-राजनीतिक चिंताओं के चलते सोना $4,800 के पार चला गया था, लेकिन अब कीमतें नरम पड़ी हैं। VT Markets के रॉस मैक्सवेल (Ross Maxwell) ने भी इस बात की पुष्टि की और कहा कि सोना 'अपने पारंपरिक सेफ-हेवन अपील और मजबूत अमेरिकी डॉलर के बीच संतुलन बना रहा है।'
ऊंची यील्ड और मजबूत डॉलर का असर
जब बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) बढ़ती हैं, तो सोना जैसी संपत्तियां जो कोई ब्याज नहीं देतीं, कम आकर्षक हो जाती हैं। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर (US Dollar) का मजबूत होना सोने को अमेरिका के बाहर के खरीदारों के लिए और महंगा बना देता है।
क्रूड ऑयल में उछाल, महंगाई की चिंता बढ़ी
ऊर्जा बाजार (Energy Markets) भी चर्चा में हैं। पश्चिम एशिया में संभावित सैन्य टकराव के संकेत मिलने के बाद क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें $110 प्रति बैरल के पार निकल गईं। इससे सप्लाई में बाधा की चिंताएं बढ़ गई हैं और वैश्विक महंगाई (Global Inflation) बढ़ने की आशंका को बल मिला है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ब्याज दरों में कटौती करेगा।
मुनाफे की बुकिंग ने रोकी तेजी
Augmont की हेड ऑफ रिसर्च, रेनिषा चैनानी (Renisha Chainani) ने बताया कि सोने और चांदी में 'ताजा ऊंचाई छूने के बाद महत्वपूर्ण प्रॉफिट-बुकिंग (Profit-Booking) देखी गई'। उन्होंने आगे कहा कि जारी संघर्ष और केंद्रीय बैंकों के सख्त संकेतों ने मंदी से जल्द राहत की उम्मीदों को कम कर दिया है, और मजबूत डॉलर ने कीमती धातुओं को और ऊपर जाने से रोका।
सोने को अभी भी मजबूत सपोर्ट
मौजूदा गिरावट के बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि सोने को अभी भी मजबूत अंतर्निहित समर्थन (Underlying Support) प्राप्त है। जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता, वैश्विक विकास को लेकर जोखिम और उच्च महंगाई का दबाव सेफ-एसेट की मांग को बनाए रखने की उम्मीद है।
भारत पर असर
वैश्विक स्तर पर सोने की ऊंची कीमतें भारत के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं। उच्च कीमतों से देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) के बढ़ने और इंपोर्टेड इन्फ्लेशन (Imported Inflation) में बढ़ोतरी की आशंका है। मजबूत डॉलर (Strong Dollar) रुपये (Rupee) पर भी दबाव बनाता है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की मॉनेटरी पॉलिसी के लिए चुनौतियां खड़ी होती हैं।
आगे क्या देखें?
बाजार अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों (US Inflation Data) और पश्चिम एशिया में होने वाले घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखेंगे। कच्चे तेल की कीमतें, मुद्रा विनिमय दरें (Currency Exchange Rates), और ब्याज दरों की उम्मीदें सोने और चांदी की कीमतों को आगे तय करेंगी।