भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान और हॉरमुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधानों की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI $95 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ईरान की ओर से तेल $200 प्रति बैरल तक पहुंचने की चेतावनी भी जारी की गई है। ऊर्जा बाजारों को शांत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के सदस्य देशों द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 40 करोड़ बैरल की समन्वित निकासी भी खास असर नहीं दिखा पाई। तेल की यह उछाल वैश्विक महंगाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा रही है।
आर्थिक चुनौतियाँ: मजबूत डॉलर और महंगाई की चिंताएँ
ये महंगाई संबंधी चिंताएं केंद्रीय बैंकों, जिनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व भी शामिल है, द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदों को कम कर रही हैं। इसी बीच, 12 मार्च, 2026 तक अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 99.48 तक मजबूत हो गया है। इससे सोना जैसी डॉलर-बहुमूल्य (dollar-denominated) कमोडिटीज अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं, जिससे नई मांग सीमित हो जाती है। स्पॉट गोल्ड की कीमतें लगभग $5,151 प्रति औंस और अप्रैल डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स लगभग $5,156 प्रति औंस पर आ गए।
चांदी की अस्थिरता और औद्योगिक माँग
चांदी की कीमतों में थोड़ी अधिक गिरावट देखी गई, जो 12 मार्च, 2026 को लगभग $85.33 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। विश्लेषकों का मानना है कि पिछले सत्रों में आई मजबूत तेजी के बाद इसमें मुनाफावसूली देखी गई। ऐतिहासिक रूप से, जनवरी 2026 में चांदी $121.64 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंची थी, जिसके बाद इसमें बड़ी गिरावट आई थी। एक निवेश संपत्ति और औद्योगिक धातु दोनों के रूप में इसकी दोहरी प्रकृति सोने की तुलना में इसकी उच्च अस्थिरता में योगदान करती है। खासकर सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और AI जैसे क्षेत्रों से औद्योगिक मांग एक प्रमुख चालक बनी हुई है। हालिया गिरावट के बावजूद, चांदी इस साल अब तक 18% से अधिक बढ़ी हुई है।
बाज़ार का प्रदर्शन और डॉलर के रुझान में बदलाव
मार्च 2026 की शुरुआत में, अन्य कीमती धातुओं में मिला-जुला प्रदर्शन रहा। प्लैटिनम 0.3% बढ़कर $2,175.32 और पैलेडियम 0.6% चढ़कर $1,646.17 पर पहुंच गया। पिछले एक महीने में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में 2.65% की मजबूती आई है। यह पिछले 12 महीनों के उसके प्रदर्शन से एक उल्लेखनीय बदलाव है, जब यह 4.19% नीचे था। डॉलर की यह हालिया मजबूती बुलियन पर नीचे की ओर दबाव डालने वाला एक प्रमुख कारक है।
विश्लेषकों की राय और आगे के प्रमुख आँकड़े
जबकि भू-राजनीतिक घटनाएं अक्सर सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में बढ़ावा देती हैं, वर्तमान में मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक दबाव हावी हैं। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों को सोने की तेजी की स्थिरता पर संदेह है, हालांकि यूबीएस और जेपी मॉर्गन जैसी अन्य संस्थाओं का वर्ष के लिए आशावादी दृष्टिकोण है, जो साल के अंत तक $6,000 प्रति औंस से ऊपर की कीमतों का अनुमान लगा रही हैं। तेल की ऊंची कीमतों से उत्पन्न महंगाई संबंधी चिंताओं के कारण तत्काल दृष्टिकोण धुंधला है। 13 मार्च, 2026 को जारी होने वाले पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स के आंकड़े भविष्य की मौद्रिक नीति की दिशा के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक होंगे। उम्मीद से अधिक गर्म PCE रीडिंग दर में कटौती की उम्मीदों को और कम कर सकती है, जिससे डॉलर मजबूत होगा और सोने की कीमतों पर दबाव पड़ेगा।
आगे क्या उम्मीद करें?
बुलियन की कीमतें कई वैश्विक ट्रिगरों के प्रति संवेदनशील रहने की उम्मीद है। इनमें मध्य पूर्व में होने वाले घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर उतार-चढ़ाव और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, विशेष रूप से पीसीई मुद्रास्फीति सूचकांक शामिल होंगे। मनोज कुमार जैन जैसे विशेषज्ञों ने बाजार सहभागियों को मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक घटनाओं और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से अपेक्षित अस्थिरता के कारण ताजा पोजीशन लेने से पहले स्थिरता का इंतजार करने की सलाह दी है।
