1 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के चलते कीमती धातुओं पर दबाव देखा गया। ग्लोबल स्पॉट गोल्ड की कीमत गिरकर $3,994 रही, जबकि चांदी 2% से ज्यादा लुढ़क गई।
क्या हुआ?
1 जुलाई 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई। ग्लोबल स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.09% गिरकर $3,994.40 प्रति औंस पर आ गई, वहीं चांदी 2.93% लुढ़क कर $57.73 प्रति औंस पर पहुंच गई। यह गिरावट अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती के बाद देखने को मिली, जो अक्सर कीमती धातुओं पर दबाव बनाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोना और चांदी नियमित ब्याज या डिविडेंड (Dividend) नहीं देते, इसलिए जब डॉलर और ब्याज दरें बढ़ती हैं तो ये निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाते हैं।
MCX फ्यूचर्स का हाल
जहां ग्लोबल मार्केट में गिरावट थी, वहीं घरेलू बाजार पिछले सत्र में मजबूत दिखा। 30 जून को, MCX पर अगस्त कॉन्ट्रैक्ट वाले गोल्ड फ्यूचर्स 0.01% की मामूली बढ़त के साथ ₹1,42,546 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए थे। इसी तरह, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी फ्यूचर्स 0.04% बढ़कर ₹2,28,665 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। यह अंतर दर्शाता है कि जब ग्लोबल मार्केट पर बिकवाली का दबाव होता है, तब भी स्थानीय मांग या करेंसी एडजस्टमेंट भारतीय कमोडिटी ट्रेडर्स को कुछ सहारा दे सकते हैं।
दाम क्यों गिरे?
हालिया गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर और कीमती धातुओं के बीच का उल्टा संबंध है। मजबूत होता डॉलर, दूसरे करेंसी का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए सोना और चांदी को महंगा बना देता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग धीमी हो सकती है। इसके अलावा, बाजार संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के लिए तैयार है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों (non-yielding assets) के आकर्षण को कम कर देती हैं, क्योंकि निवेशक बॉन्ड या बचत खातों में ज्यादा रिटर्न की तलाश करते हैं।
मार्केट का आउटलुक
LKP सिक्योरिटीज के विश्लेषकों के अनुसार, गोल्ड मार्केट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण करेक्शन (Correction) देखा है, जो जून में 12% गिरकर $4,500 से लगभग $3,950 पर आ गया था। हालांकि इस उतार-चढ़ाव ने मार्केट को ओवरसोल्ड (Oversold) स्थिति में पहुंचा दिया है - यानी कीमतें तेजी से गिरी हैं - कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि $4,000 के आसपास की कीमतें अभी भी नई खरीदारी को आकर्षित कर रही हैं।
आगे क्या देखें?
आने वाले दिनों में निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखना है। ADP एम्प्लॉयमेंट, नॉन-फार्म पेरोल और राष्ट्रीय बेरोजगारी के प्रमुख आंकड़े जल्द ही आने वाले हैं। ये आर्थिक संकेतक अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती के बारे में संकेत देंगे और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले को प्रभावित करेंगे। निवेशक यह देख सकते हैं कि ये रिलीज अमेरिकी डॉलर को कैसे प्रभावित करती हैं, क्योंकि एक मजबूत डॉलर सोने और चांदी पर दबाव बनाए रख सकता है, जबकि कमजोर डॉलर रिकवरी को सहारा दे सकता है।
