लगातार गिरावट के बाद 8 अक्टूबर, 2026 को Multi Commodity Exchange (MCX) पर गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में रिकवरी देखी गई है। निवेशकों ने निचले स्तर पर खरीदारी शुरू की है, लेकिन US Federal Reserve के रेट हाइक के संकेतों से बाजार अभी भी सतर्क है।
लगातार गिरावट झेलने के बाद, 8 अक्टूबर, 2026 को कीमती धातुओं में सुधार देखने को मिला है। गोल्ड दिसंबर फ्यूचर्स करीब 0.37% की तेजी के साथ ₹1,49,660 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है। वहीं, सिल्वर फ्यूचर्स में भी मजबूती है और यह ₹2,23,885 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इस तेजी की मुख्य वजह निवेशकों द्वारा 'डिप्ड प्राइसेज' पर की गई खरीदारी है।
मैक्रो प्रेशर अभी भी बरकरार
इस रिकवरी को तात्कालिक राहत के तौर पर देखा जा रहा है। डॉलर में आई हल्की कमजोरी ने गोल्ड और सिल्वर को सपोर्ट दिया है, लेकिन नॉन-यील्डिंग एसेट्स के लिए माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
सबसे बड़ी चिंता US Federal Reserve की मॉनेटरी पॉलिसी है। साल के अंत तक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी (Interest Rate Hikes) की आशंका बनी हुई है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने-चांदी का आकर्षण कम हो जाता है क्योंकि निवेशक बॉन्ड और डिपॉजिट जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
टेक्निकल और जियोपॉलिटिकल रिस्क
मार्केट इंडिकेटर्स के मुताबिक, मौजूदा प्राइस स्ट्रक्चर अभी भी नाजुक है। ओपन इंटरेस्ट बढ़ने का मतलब है कि अभी भी ऐसे ट्रेडर्स की बड़ी संख्या है जो और गिरावट की दांव लगा रहे हैं। यदि सोना-चांदी अपने सपोर्ट लेवल को बनाए नहीं रख पाते, तो बाजार में फिर से बिकवाली का दबाव बन सकता है।
इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव भी कीमतों को प्रभावित कर रहा है। हालांकि, 'सेफ-हेवन' डिमांड के बावजूद ऊंची ब्याज दरों और महंगाई का दबाव मार्केट में हावी है। आने वाले समय में US इकोनॉमिक डेटा और फेड अधिकारियों के बयान ही तय करेंगे कि इन धातुओं की चाल क्या होगी।
