कीमतों में आई तूफानी तेजी, पर असरदार नहीं
सोमवार को भारतीय बाजारों में सोना और चांदी की कीमतों में जबरदस्त वापसी देखने को मिली। सुबह के समय आई गिरावट के बाद, शाम होते-होते सोने का भाव ₹1,48,746 प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव ₹2,59,500 प्रति किलो के स्तर पर जा पहुंचा। यह भाव दिन के सबसे निचले स्तर ₹1,42,270 (सोना) और ₹2,36,496 (चांदी) से काफी ऊपर थे।
खरीदारों की कन्फ्यूजन और बिक्री पर असर
लेकिन यह उछाल खरीदारों के लिए उम्मीद की किरण नहीं बन पाया। दिन भर चली कीमतों की भारी उठा-पटक ने ग्राहकों को कन्फ्यूज कर दिया, जिसकी वजह से सुबह के समय पूछताछ करने वाले कई ग्राहक आखिर में खरीदारी नहीं कर पाए। ज्वैलर्स का कहना है कि कीमतों में इस तरह की बार-बार होने वाली हलचल अंतरराष्ट्रीय मार्केट की ओपनिंग से जुड़ी है, और इससे ग्राहकों में अनिश्चितता बढ़ जाती है। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे तेज उतार-चढ़ाव के चलते ग्राहक अक्सर इंतजार करने की रणनीति अपनाते हैं, जब तक उन्हें मार्केट में स्थिरता का एहसास न हो।
निवेशक कर रहे खरीदारी, पर क्यों?
इस मांग को प्रभावित करने वाले असर के बावजूद, कुछ समझदार निवेशकों ने कीमतों में आई गिरावट पर सोना और चांदी खरीदना जारी रखा। इससे इन सुरक्षित निवेश (safe-haven assets) वाली धातुओं की कीमतों को कुछ सपोर्ट मिला।
मार्केट की चाल और बड़े फैक्टर्स
यह मौजूदा स्थिति हाल के करेक्शन के बाद आई है। इससे पहले, 29 जनवरी को सोना अपने ऑल-टाइम हाई ₹1,75,340 प्रति 10 ग्राम और चांदी अपने शिखर ₹3.8 लाख प्रति किलो के स्तर से गिरे थे। मार्केट के जानकारों का मानना है कि कीमतों में यह बड़े उतार-चढ़ाव कई वजहों से हैं, जिनमें इन्फ्लेशन (मुद्रास्फीति) की उम्मीदों में बदलाव और वैश्विक मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) का ब्याज दरों पर रुख शामिल है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) भी सोने की सुरक्षित निवेश वाली अपील को बढ़ा रहे हैं।
रुपये और हेजिंग की भूमिका
भारत में, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल सोने की कीमतों पर गहरा असर डालती है। जब रुपया कमजोर होता है, तो भारत में सोने का भाव बढ़ जाता है। इस प्राइस रिस्क से बचने के लिए, भारतीय ज्वैलर्स अक्सर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) जैसे प्लेटफॉर्म पर हेजिंग (hedging) का सहारा लेते हैं। इसमें वे फिजिकल मार्केट में सोना खरीदने के साथ-साथ फ्यूचर्स मार्केट में उसे बेचकर संभावित नुकसान से बचते हैं।
बजट का असर और भविष्य की राह
हाल ही में आए यूनियन बजट 2026 में फिस्कल कंसॉलिडेशन (राजकोषीय समेकन) और इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) पर खर्च की बात कही गई है, जो लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि का संकेत देता है। हालांकि, बजट में कमोडिटी मार्केट (commodity market) पर सीधा असर डालने वाले कोई खास उपाय नहीं किए गए। भारत में ज्वैलरी के लिए सोने पर निर्भरता बनी हुई है, जिससे यह मार्केट में महत्वपूर्ण बना रहेगा। ज्वैलर्स अब प्राइस रिस्क को मैनेज करने और ग्राहकों से बेहतर कम्युनिकेशन पर ध्यान दे रहे हैं। हालिया उछाल निवेशकों की रुचि तो दिखाता है, लेकिन लगातार बने रहने वाले उतार-चढ़ाव से बिक्री बढ़ाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।