शटडाउन और फेड पॉलिसी का असर, लौटी तेजी
बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतों में आज की तेजी मुख्य रूप से प्रॉफिट-बुकिंग (Profit-booking) और टेक्निकल रिकवरी (Technical Recovery) की वजह से आई है। अमेरिकी सरकार के आंशिक शटडाउन के चलते अहम इकोनॉमिक डेटा, जैसे कि जनवरी का जॉब्स रिपोर्ट, जारी नहीं हो सका। इससे बाजार में नई जानकारी का फ्लो कम हो गया, और कीमतें हेडलाइंस और स्पेकुलेटिव पोजीशन (Speculative Position) पर ज्यादा रिएक्ट करने लगीं।
डॉलर का मिला-जुला असर और नीतिगत संकेत
हालांकि, अमेरिकी डॉलर (US Dollar) अपनी मजबूती बनाए हुए था, जो आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव डालता है। लेकिन, इस बार व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक (Macroeconomic) चिंताओं के चलते यह असर कम रहा। निवेशक अभी भी यह उम्मीद कर रहे हैं कि फेडरल रिजर्व 2026 में कम से कम दो बार ब्याज दरें घटा सकता है। यह एक ऐसा संकेत है जो सोने जैसी कीमती धातुओं के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता।
एक्सपर्ट की नज़र में सोने का भविष्य
वेंचुरा (Ventura) के कमोडिटी और सीआरएम (CRM) हेड एन एस रामास्वामी का मानना है कि हालिया गिरावट सोने के लंबी अवधि के अपट्रेंड (Uptrend) का अंत नहीं है। वे मजबूत फंडामेंटल का हवाला देते हैं: सेंट्रल बैंकों ने Q4 2025 में 230 टन सोना खरीदा, और 2026 में 800 टन से अधिक की उम्मीद है। ईटीएफ (ETF) होल्डिंग्स में बढ़ोतरी से भी लगातार मांग बनी हुई है। बढ़ते जियोपॉलिटिकल (Geopolitical) और मैक्रोइकोनॉमिक जोखिम सोने को एक महत्वपूर्ण हेज (Hedge) बनाए रखते हैं। रामास्वामी को उम्मीद है कि सोना 2026 में अपने हालिया फ्यूचर्स (Futures) हाई $5,645 प्रति औंस को पार कर जाएगा, लेकिन वे इसमें उतार-चढ़ाव बने रहने की भी आशंका जताते हैं।
चांदी के लिए धीमी रिकवरी की राह
चांदी में सोने की तुलना में अधिक बड़ी गिरावट देखी गई थी, जिसकी मुख्य वजह बाजार में अधिक लिवरेज (Leverage) का होना है। मार्जिन रिक्वायरमेंट्स (Margin Requirements) में वृद्धि के कारण कुछ ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन बेचनी पड़ी, जिससे कीमतों में और गिरावट आई। रामास्वामी को निकट भविष्य में चांदी के $72 से $78 प्रति औंस के दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है। एक स्पष्ट रिकवरी का संकेत तभी मिलेगा जब कीमतें $80 प्रति औंस के ऊपर टिक पाएंगी। लंबी अवधि में, कीमतों में स्थिरता आने से सप्लाई-डिमांड डायनामिक्स (Supply-demand Dynamics) बदल सकती है और चांदी की रिकवरी में मदद मिल सकती है।