सोना-चांदी में तूफानी तेजी! पश्चिम एशिया में शांति से चमके दाम, पर मची है ये चिंता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
सोना-चांदी में तूफानी तेजी! पश्चिम एशिया में शांति से चमके दाम, पर मची है ये चिंता
Overview

पश्चिम एशिया में तनाव में आई नरमी के चलते सोने और चांदी की कीमतों में आज जबरदस्त तेजी देखी गई। बाजार के जानकारों ने इसे 'रिलीफ रैली' बताया, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह तेजी नाजुक है। महंगाई, ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती जैसे कई कारक पूरे साल कीमतों में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं।

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पश्चिम एशिया में शांति से चमके सोने-चांदी के दाम

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की खबरों से कीमती धातुओं में आज तगड़ा उछाल आया। भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 2.24% चढ़कर ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जबकि चांदी फ्यूचर्स 5.24% बढ़कर ₹2.43 लाख प्रति किलोग्राम हो गई। यह तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को दो हफ्ते के लिए रोकने की घोषणा के बाद आई। इससे सप्लाई में रुकावट और महंगाई बढ़ने का डर कम हुआ। ग्लोबल मार्केट में भी सोने के दाम करीब 2.3% बढ़कर $4,812 प्रति औंस और अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.4% बढ़कर $4,841 पर पहुंच गए। चांदी में भी करीब 5% का उछाल आया और यह $76 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी। ट्रेडर्स इसे 'रिलीफ रैली' मान रहे हैं।

आर्थिक चुनौतियां बढ़ा सकती हैं कीमतें

हालांकि, इस तेजी के बने रहने पर कई आर्थिक चुनौतियां मंडरा रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) का सतर्क रुख बताता है कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद अभी जल्द नहीं है। मार्च के लिए आए अमेरिकी CPI डेटा में महंगाई 3.5% सालाना रही, जो फेड के लक्ष्य से ऊपर है। आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों को कम आकर्षक बनाती हैं। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (U.S. Dollar Index - DXY) भी 105.5 के करीब मजबूत बना हुआ है, जो सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकता है। इससे पहले भी ऐसी भू-राजनीतिक शांति वाली रैलियां अक्सर जल्दी ही फीकी पड़ गई हैं, खासकर तब जब तनाव फिर भड़क जाए या आर्थिक कारक हावी हो जाएं।

सोने-चांदी के अपने अलग फैक्टर

सोना एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर अहम है, लेकिन इसकी कीमतें ग्लोबल आर्थिक हालात से जुड़ी रहती हैं। जहां औद्योगिक कमोडिटीज (Industrial Commodities) आर्थिक ग्रोथ के साथ बढ़ती हैं, वहीं सोने का मूल्य मुख्य रूप से महंगाई के अनुमानों, सेंट्रल बैंकों की चालों और करेंसी ट्रेंड्स से तय होता है। मौजूदा स्थिति मिली-जुली है: महंगाई सोने के लिए अच्छी है, लेकिन लगातार ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद एक बड़ी बाधा है। VT Markets के विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा, जिसमें मामूली बढ़त की संभावना के साथ-साथ बड़े जोखिम भी मौजूद हैं। VT Markets की ग्लोबल स्ट्रेटेजी ऑपरेशंस लीड, रॉस मैक्सवेल (Ross Maxwell) ने कहा कि मजबूत अमेरिकी डॉलर सोने की बढ़त को सीमित कर सकता है। वहीं, चांदी औद्योगिक मांग के प्रति अधिक संवेदनशील है, इसलिए इसका प्रदर्शन ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर करेगा।

आगे क्या? अस्थिरता जारी, भारत में मांग का सहारा

आगे चलकर, कीमती धातुओं के बाजार में कई तरह के प्रभाव बने रहेंगे। विश्लेषक आम तौर पर 2026 तक बाजार में अस्थिरता (Volatility) जारी रहने की उम्मीद कर रहे हैं। साल के अंत तक सोने की कीमतों के $4,700 से $5,000 के बीच रहने का अनुमान है, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि महंगाई, ब्याज दरें और भू-राजनीतिक स्थिरता कैसे विकसित होती है। भारत जैसे बड़े सोने के खरीदार के लिए, घरेलू मांग एक स्थिर सहारा दे रही है। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि कीमतों में हल्की सी गिरावट भी अक्सर खरीदारी को बढ़ा देती है, खासकर गहनों के लिए। यह स्थानीय मांग कीमतों को सहारा दे सकती है, भले ही ग्लोबल आर्थिक कारक बाजार की दिशा तय करते रहें।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.