Gold-Silver Latest: भू-राजनीतिक तनाव का असर, सोने-चांदी में आई तूफानी तेजी, जानें वजह

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AuthorAditya Rao|Published at:
Gold-Silver Latest: भू-राजनीतिक तनाव का असर, सोने-चांदी में आई तूफानी तेजी, जानें वजह
Overview

सोने और चांदी की कीमतों में आज जोरदार उछाल देखा जा रहा है। यह तेजी अमेरिका-ईरान तनाव और नई टैरिफ (tariff) अनिश्चितता के बीच आई है, जबकि यूएस डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) में नरमी है, जिससे निवेशक इन सेफ-हेवन एसेट्स (safe-haven assets) की ओर खिंचे चले आ रहे हैं।

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जिओपॉलिटिकल टेंशन और टैरिफ अनिश्चितता का दबदबा

कीमती मेटल्स (precious metals) में यह तेजी मुख्य रूप से ग्लोबल टेंशन और पॉलिसी अनिश्चितता की वजह से है। स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) की कीमत 26 फरवरी 2026 को बढ़कर $5,186.09 प्रति औंस पर पहुंच गई, खासकर जब अमेरिका-ईरान के बीच जिनेवा में चल रही बातचीत को लेकर चिंताएं बढ़ीं। वहीं, चांदी की कीमत भी करीब $89.13 प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो इन कीमती मेटल्स की fuerte मांग को दिखाता है।

भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है, जहां ईरान नए प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में है और अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। इसी बीच, 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ पुराने टैरिफ (tariffs) को अमान्य कर दिया। हालांकि, इसके तुरंत बाद 24 फरवरी से ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत 15% का नया टैरिफ लागू कर दिया गया, जिससे वैश्विक व्यापार और मेटल्स जैसे सेक्टरों में लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। इस बीच, यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) भी कमजोर हुआ है। 26 फरवरी 2026 को यह 97.5796 पर आ गया, जो पिछले एक साल में 9.01% की गिरावट है। डॉलर में इस नरमी ने भी सोने-चांदी की मौजूदा तेजी को सहारा दिया है।

महंगाई, फेड की नीति और अलग-अलग फोरकास्ट

हालांकि, बाजार की यह चाल थोड़ी जटिल है। अमेरिका में महंगाई (inflation) दर जनवरी 2026 में घटकर 2.4% पर आ गई है, जो कि पिछले महीनों से कम है। कोर इन्फ्लेशन 2.5% पर है। महंगाई में इस नरमी के चलते फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ब्याज दरों को लेकर अलग-अलग उम्मीदें हैं। जहां शुरुआत में बाजार 2026 में दो 25-बेसिस-पॉइंट (basis-point) रेट कट की उम्मीद कर रहा था, वहीं अब कुछ एनालिस्ट महंगाई घटने को देखते हुए तीन या उससे अधिक कट की संभावना जता रहे हैं।

हालांकि, फेडरल रिजर्व ने अपनी फेडरल फंड्स रेट की रेंज 3.50%-3.75% पर बरकरार रखी है और डेटा पर निर्भर रहने का संकेत दिया है। जेपी मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च (J.P. Morgan Global Research) का मानना है कि फेड 2026 में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। नए फेड चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम पर भी चर्चाओं ने मोनेटरी पॉलिसी को लेकर और जटिलता बढ़ा दी है।

विश्लेषकों के सोने के लिए टारगेट प्राइस काफी अलग-अलग हैं, जेपी मॉर्गन ने 2026 के अंत तक $6,300 प्रति औंस का लक्ष्य रखा है, जबकि कुछ अन्य $7,000-$8,000 तक जाने की बात कह रहे हैं। चांदी के लिए भी फोरकास्ट में काफी भिन्नता है, टेक्निकल मॉडल $88 प्रति औंस से ऊपर के लक्ष्य दिखा रहे हैं, जबकि कुछ बैंक $85 के आसपास का अनुमान लगा रहे हैं। ऐतिहासिक तौर पर, भू-राजनीतिक घटनाएं और आर्थिक अनिश्चितता सोने-चांदी को सेफ-हेवन एसेट्स के तौर पर बढ़ावा देती रही हैं। सेंट्रल बैंक द्वारा सोने के भंडार में वृद्धि और सौर ऊर्जा व इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे सेक्टरों से चांदी की मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड भी इसके भावों को सपोर्ट करती है।

भविष्य की राह: कहां देखें?

हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता मेटल्स को सपोर्ट कर रही है, लेकिन कुछ ऐसे फैक्टर भी हैं जो इस तेजी पर लगाम लगा सकते हैं। फेडरल रिजर्व 2% के महंगाई लक्ष्य को पाने के लिए प्रतिबद्ध है। अगर वे जल्दबाजी में कोई आक्रामक ईजिंग (easing) पॉलिसी अपनाते हैं, तो इससे महंगाई फिर बढ़ सकती है, जो सोने-चांदी के रियल वैल्यू के लिए ठीक नहीं होगा।

अगर अमेरिका-ईरान तनाव कम होता है या नए टैरिफ लागू होने के बाद हालात सामान्य होते हैं, तो निवेशकों द्वारा चुकाई जा रही 'फियर प्रीमियम' (fear premium) कम हो सकती है। नए टैरिफ फिलहाल सप्लाई चेन की अनिश्चितता के कारण मेटल्स की कीमतों को बढ़ा रहे हैं, लेकिन अगर ये इकोनॉमिक ग्रोथ को धीमा करते हैं या मैन्युफैक्चरर्स के लिए लागत बढ़ाते हैं, तो ये चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड को भी प्रभावित कर सकते हैं।

फेड की मौजूदा स्थिति (रेट 3.50%-3.75% पर) और भविष्य में रेट कट को लेकर अलग-अलग राय, एक सतर्क रुख दर्शाती है, जो कमोडिटीज में लगातार निवेश को शायद पूरी तरह सपोर्ट न करे। इतिहास गवाह है कि संकट के समय सेफ-हेवन डिमांड में उछाल आता है, लेकिन जब भू-राजनीतिक हालात सामान्य हो जाते हैं या इकोनॉमिक फंडामेंटल्स मजबूत होते हैं, तो यह तेजी पलट भी सकती है।

आगे चलकर, कीमती मेटल्स का बाजार अमेरिका-ईरान संबंधों, नए अमेरिकी टैरिफ के लागू होने और फेडरल रिजर्व की मोनेटरी पॉलिसी पर बारीकी से नजर रखेगा। विश्लेषकों के बीच भविष्य की कीमतों को लेकर मतभेद बने हुए हैं, लेकिन मौजूदा माहौल में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। सेंट्रल बैंक और इंडस्ट्रियल सेक्टर से मिल रही लगातार डिमांड एक सपोर्ट बेस प्रदान करती है, लेकिन किसी भी बड़ी रैली की रफ्तार भू-राजनीतिक जोखिम, मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता और फेड की महंगाई पर काबू पाते हुए इकोनॉमिक ग्रोथ को बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

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