Gold-Silver Rally: डॉलर लुढ़का, कीमती धातुओं में तूफानी तेजी! जानें क्या है वजह

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold-Silver Rally: डॉलर लुढ़का, कीमती धातुओं में तूफानी तेजी! जानें क्या है वजह
Overview

सोमवार को कीमती धातुओं, Gold और Silver, के बाज़ार में जबरदस्त तेज़ी देखने को मिली। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना और वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता रही। Silver की कीमतों में **6.66%** का उछाल आया, जिससे यह **₹2.72 लाख प्रति किलोग्राम** तक पहुंच गई, वहीं Gold **0.83%** चढ़कर **₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम** के स्तर पर बंद हुई।

डॉलर की नरमी ने बढ़ाई Gold-Silver की चमक

आज की तेजी सिर्फ डॉलर के कमजोर होने का नतीजा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और केंद्रीय बैंकों की रणनीतिक चालों को भी दर्शाती है। डॉलर इंडेक्स में 0.30% की गिरावट आई, जो लगभग 97 के स्तर पर पहुंच गया। इस कमजोरी ने डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटीज (Dollar-denominated commodities) को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सस्ता बना दिया, जिससे Gold और Silver की मांग बढ़ी। विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनावों को लेकर बनी चिंताएं भी निवेशकों को सुरक्षित मानी जाने वाली Gold जैसी धातुओं की ओर खींच रही हैं।

Silver में ज़्यादा उथल-पुथल, Gold की स्थिर चाल

जहां Gold ने अपनी पारंपरिक सुरक्षित निवेश (Safe-haven) की भूमिका निभाई, वहीं Silver में आज कहीं ज़्यादा उतार-चढ़ाव (Volatility) देखा गया। Silver में 6.66% की बड़ी छलांग के पीछे सट्टेबाजी (Speculative interest) का हाथ माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि छोटे बाज़ार आकार और औद्योगिक मांग में बदलाव की वजह से Silver की कीमतों में बड़ी चाल देखने को मिलती है। इसके विपरीत, Gold में 0.83% की मामूली बढ़ोतरी इसकी स्थिरता को दर्शाती है। बाज़ार पर नज़र रखने वाले इस बात पर गौर कर रहे हैं कि क्या Silver की यह तेज़ी बनी रहेगी या इसकी वोलेटिलिटी ही इसके लिए खतरा साबित होगी।

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और बाज़ार का भरोसा

Gold और Silver की मौजूदा तेज़ी के पीछे केंद्रीय बैंकों का लगातार निवेश भी एक बड़ा कारण है। चीन के People's Bank of China ने लगातार 15वें महीने जनवरी में भी Gold की खरीदारी जारी रखी है। इतनी ऊंची कीमतों पर भी केंद्रीय बैंकों की यह खरीद Gold के लिए एक मज़बूत आधार (Structural floor) तैयार करती है और इसे एक प्रमुख रिजर्व एसेट (Reserve asset) के तौर पर स्थापित करती है। शुरुआती 2026 के दौरान Gold-backed Exchange Traded Funds (ETFs) जैसे GLD में भी भारी निवेश देखा गया, जिसका मकसद महंगाई (Inflation) और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव था।

मंदी की आशंकाएं (Bear Case) और आगे क्या?

हालांकि, बाज़ार में फिलहाल तेज़ी का माहौल है, लेकिन कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। Silver में आज देखी गई भारी वोलेटिलिटी, जो सट्टेबाजी के कारण थी, कीमतों में अचानक गिरावट का संकेत दे सकती है। इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, जैसे कि नॉन-फार्म पेरोल (Nonfarm Payrolls) और उपभोक्ता महंगाई दर (Consumer Inflation Figures), अगर उम्मीद से बेहतर रहे, तो फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) अपनी मौद्रिक नीति को सख्त कर सकता है। इससे डॉलर फिर मजबूत होगा और Gold-Silver की कीमतों पर दबाव आ सकता है। इतिहास गवाह है कि मज़बूत रोज़गार रिपोर्टें कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट ला सकती हैं। इसके अलावा, अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होते हैं, तो सुरक्षित निवेश की मांग घट सकती है, खासकर Gold के लिए।

आगे की राह: अमेरिकी आंकड़े तय करेंगे दिशा

अब सभी की निगाहें बुधवार को आने वाले अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल और बेरोज़गारी दर के आंकड़ों पर टिकी हैं, और फिर शुक्रवार को उपभोक्ता महंगाई के आंकड़े जारी होंगे। ये रिपोर्ट्स अमेरिकी डॉलर की दिशा तय करेंगी, जिसका सीधा असर Gold और Silver की कीमतों पर पड़ेगा। अगर आंकड़े मज़बूत अर्थव्यवस्था या बढ़ती महंगाई का संकेत देते हैं, तो डॉलर मजबूत हो सकता है और कीमती धातुओं पर दबाव बन सकता है। वहीं, अगर आंकड़े कमजोर आते हैं, तो मौजूदा तेज़ी का दौर जारी रह सकता है।

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