Gold, Silver Price: सोने-चांदी में तूफानी तेज़ी की उम्मीद, पर 18 महीने बाद बड़ा Crash!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold, Silver Price: सोने-चांदी में तूफानी तेज़ी की उम्मीद, पर 18 महीने बाद बड़ा Crash!
Overview

सोने (Gold) और चांदी (Silver) की भूमिका बदल गई है, अब ये महज़ 'सेफ हेवन' (Safe Haven) न रहकर 'स्पेकुलेटिव रिस्क एसेट्स' (Speculative Risk Assets) की तरह व्यवहार कर रहे हैं। PACE 360 के अमित गोयल का अनुमान है कि नज़दीकी भविष्य में इनमें तेज़ी आ सकती है, जिसमें Gold **$5,000** और Silver **$85** का लक्ष्य छू सकते हैं। हालांकि, वे अगले **12-18 महीनों** में अमेरिका में मंदी (Recession) और ग्लोबल डिफ्लेशन (Deflation) के कारण कीमतों में भारी गिरावट की चेतावनी दे रहे हैं।

PACE 360 के मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट अमित गोयल के अनुसार, सोना (Gold) और चांदी (Silver) अब केवल 'सेफ हेवन' (Safe Haven) के तौर पर नहीं, बल्कि 'स्पेकुलेटिव रिस्क एसेट्स' (Speculative Risk Assets) की तरह व्यवहार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि बाज़ार की भावनाएं (Market Sentiment) इनके भावों में ज़्यादा उतार-चढ़ाव ला सकती हैं, और ये पारंपरिक इन्फ्लेशन हेजिंग (Inflation Hedging) की भूमिका से हट रहे हैं।

लम्बी अवधि के मंदी वाले नज़रिया (Bearish Outlook) के बावजूद, PACE 360 फिलहाल 1 से 2 महीनों के लिए सोने और चांदी में खरीदारी की सलाह दे रहा है। गोयल का अनुमान है कि मध्य पूर्व (Middle East) में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) में कमी आने से इनमें तेज़ी आएगी। इससे इन्फ्लेशन और बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) की चिंताएं कम होंगी, जिससे रिस्क एसेट्स, शेयर और कमोडिटीज़ (Commodities) को फायदा मिलेगा और अमेरिकी डॉलर (US Dollar) कमज़ोर होगा। सोने की कीमत जो फिलहाल लगभग $4,400 प्रति औंस (Ounce) है, उसके $5,000 तक पहुँचने की उम्मीद है। वहीं, ज़्यादा वोलेटाइल रहने वाली चांदी (Silver) करीब $69.5 से बढ़कर $85-$86 के स्तर तक जा सकती है। यह अनुमान तब है जब डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) मौजूदा 100.50 के स्तर से गिरकर अगले 2 महीनों में 97-98 पर आ जाए। ऐतिहासिक रूप से, कमज़ोर डॉलर विदेशी खरीदारों के लिए सोना-चांदी को सस्ता बनाता है, जिससे मांग बढ़ती है।

हालांकि, गोयल का लम्बी अवधि का नज़रिया (Long-term View) बेहद मंदी वाला (Bearish) है। उनका यह अनुमान अमेरिका में अगले 1 साल के अंदर मंदी (Recession) आने की भविष्यवाणी पर आधारित है, जिससे अगले 12 से 18 महीनों में ग्लोबल डिफ्लेशनरी ट्रेंड (Global Deflationary Trend) शुरू हो सकता है। डिफ्लेशन के माहौल में, सभी एसेट्स की खरीद शक्ति (Purchasing Power) घट जाती है, जो कि इन्फ्लेशन के विपरीत है और आमतौर पर सोने की कीमतों को सहारा देता है। गोयल का मानना है कि यह मौजूदा तेज़ी बाज़ार में एक नई बुल मार्केट (Bull Market) का संकेत नहीं, बल्कि एक अस्थायी ठहराव (Temporary Pause) है। उनका कहना है कि गंभीर आर्थिक मंदी और डिफ्लेशनरी झटकों के दौरान, कमोडिटीज़ की मांग कम हो जाती है और नकदी (Cash) की अहमियत बढ़ जाती है, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आती है।

जहाँ औद्योगिक धातुएं (Industrial Metals) जैसे तांबा (Copper), सीधे वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और आर्थिक स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं, वहीं सोने की कीमत का बाज़ार बहुत बड़ा है। सोने की माइनिंग करने वाली बड़ी कंपनियों, जैसे Barrick Gold (GOLD) और Newmont Corporation (NEM) के शेयर, जिनकी वैल्यूएशन P/E रेश्यो के हिसाब से देखें तो ये भी आर्थिक मंदी और ऑपरेशनल चुनौतियों के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, आने वाले 2 महीने सोने और चांदी के लिए उतार-चढ़ाव भरे (Volatile) रह सकते हैं, जिसमें अल्पकालिक तेज़ी की संभावना है। लेकिन, मुख्य अनुमान अगले 12-18 महीनों में कीमतों में एक बड़ी गिरावट की ओर इशारा करता है। निवेशकों को अमेरिकी मंदी के दबाव और वैश्विक डिफ्लेशनरी ताकतों के हावी होने पर कीमतों में तेज उलटफेर (Sharp Reversal) के लिए तैयार रहना चाहिए।

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