इस हफ्ते सोना और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है, दोनों कीमती धातुओं में **5%** से ज़्यादा का उछाल आया है। इसकी वजह अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट की लंबी अवधि के बॉन्ड की खरीदारी (Buyback) को दोगुना करने की योजना है।
अमेरिकी ट्रेजरी के फैसले का असर
यह बड़ी खबर अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट की ओर से आई है। उन्होंने 9 सितंबर, 2026 से 10 से 30 साल तक की अवधि वाले बॉन्ड की 'लॉन्ग-टर्म डेट बायबैक' को कम से कम दोगुना करने का ऐलान किया है। मार्केट का मानना है कि यह कदम बॉन्ड मार्केट में 'बायर्स स्ट्राइक' यानी खरीदारों की कमी की समस्या को दूर करने और कर्ज की लागत को काबू में रखने के लिए उठाया गया है। आपको बता दें कि हाल ही में 30-साल के ट्रेजरी यील्ड 5.33% के कई दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए थे।
क्यों भागे सोना-चांदी?
इस फैसले का सीधा असर यह हुआ कि ट्रेजरी यील्ड नीचे आ गए। जब सरकार अपने ही बॉन्ड को वापस खरीदती है, तो बॉन्ड की कीमतें बढ़ती हैं और यील्ड घटते हैं। चूंकि सोना और चांदी जैसी धातुओं पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए जब बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली संपत्तियों पर रिटर्न कम हो जाता है, तो ये कीमती धातुएं निवेशकों के लिए ज़्यादा आकर्षक हो जाती हैं। इसके साथ ही, डॉलर के कमजोर होने से ये कीमती धातुएं अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सस्ती हो गईं, जिससे इनकी कीमतों को और बढ़ावा मिला।
भू-राजनीतिक तनाव का भी सहारा
अमेरिकी बॉन्ड मार्केट के अलावा, ईरान के साथ जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (ऊर्जा शिपिंग का अहम रास्ता) का बंद होना भी कीमतों को सपोर्ट कर रहा है। इन वजहों से ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का डर बना हुआ है। ऐसे में निवेशक 'सेफ-हेवन' यानी सुरक्षित माने जाने वाली संपत्तियों की ओर रुख करते हैं, जिसका सीधा फायदा सोने और चांदी को मिल रहा है।
आगे क्या?
हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स इस तेजी के टिकाऊपन पर सवाल भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यह बायबैक प्रोग्राम सिर्फ एक फौरी राहत है और अमेरिका के लंबे समय के कर्ज या फिस्कल डेफिसिट की असली समस्या को हल नहीं करता। अगर ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं या सरकारी खर्च ज़्यादा रहता है, तो महंगाई फिर से बढ़ सकती है। ऐसे में, मार्केट को ब्याज दरों पर अपने अनुमानों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है, जिसका असर सोना-चांदी की मौजूदा बढ़त पर पड़ सकता है। इस बीच, Agnico Eagle और Barrick जैसी गोल्ड माइनिंग कंपनियों के शेयरों में भी मजबूती देखी गई है।
