कमजोर अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा के बाद सोने और चांदी की कीमतों में करीब 2% और 2.82% की उछाल आई है। डेटा में केवल 57,000 नई नौकरियां सामने आईं, जिससे बाजार को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व आक्रामक ब्याज दर वृद्धि रोक सकता है।
क्या हुआ?
शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। COMEX गोल्ड करीब 2% बढ़कर $4,202.80 प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि COMEX सिल्वर 2.82% बढ़कर $62.785 प्रति औंस हो गया। यह तेजी बुलियन के लिए पांच हफ्तों में पहली साप्ताहिक बढ़त का संकेत देती है। इस हलचल का मुख्य कारण अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट थी, जिसमें पता चला कि पिछले महीने अर्थव्यवस्था में केवल 57,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जो 110,000 के अनुमान से काफी कम है।
कम ब्याज दरें कीमती धातुओं के लिए क्यों फायदेमंद हैं?
सोने और चांदी जैसी कीमती धातुएं अक्सर 'नॉन-यील्डिंग' संपत्ति मानी जाती हैं, जिसका मतलब है कि वे कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं देती हैं। जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व जैसे केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो सोना रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है क्योंकि निवेशक सरकारी बॉन्ड या नकदी में अधिक रिटर्न कमा सकते हैं। इसके विपरीत, जब जॉब्स डेटा कमजोर होता है और दर वृद्धि की उम्मीदें कम हो जाती हैं, तो सोने पर दबाव कम हो जाता है। नवीनतम डेटा ने ट्रेडर्स को सितंबर में दर वृद्धि की अपनी उम्मीदों को कम करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे बुलियन के प्रति सेंटिमेंट में सीधे सुधार हुआ है।
भू-राजनीति और मुद्रास्फीति की गतिशीलता
ब्याज दरों से परे, बुलियन की कीमतों को अन्य मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों से भी समर्थन मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जो व्यापक मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को शांत करने में मदद कर सकती है। इसके अतिरिक्त, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव की रिपोर्टों सहित भू-राजनीतिक विकास ने सोने में एक पारंपरिक सुरक्षित-संपत्ति (safe-haven asset) के रूप में रुचि को नवीनीकृत किया है। निवेशक अक्सर बाजार की अस्थिरता से बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के समय में सोने में अपना आवंटन बढ़ाते हैं।
केंद्रीय बैंक की मांग और खरीद के रुझान
केंद्रीय बैंकों से मिलने वाली संरचनात्मक मांग सोने की कीमतों के लिए एक आधार प्रदान करती रहती है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से पता चलता है कि मई में वैश्विक आधिकारिक सोने के भंडार में शुद्ध 41 टन की वृद्धि हुई। यह खरीद प्रवृत्ति दर्शाती है कि केंद्रीय बैंक सक्रिय रूप से अपने भंडार में विविधता ला रहे हैं, जो कमोडिटीज मार्केट में अल्पकालिक सट्टा हलचल से निरपेक्ष, कीमतों के लिए एक दीर्घकालिक तल प्रदान करता है।
निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?
निवेशकों को आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति रिपोर्टों और फेडरल रिजर्व के सदस्यों की आधिकारिक टिप्पणियों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये मौद्रिक नीति के संबंध में बाजार की उम्मीदों के अगले चरण को निर्धारित करने की संभावना है। भारत में, खुदरा और संस्थागत निवेशकों को अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और भारतीय रुपये की चाल पर भी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि घरेलू सोने की कीमतें स्थानीय मुद्रा में परिवर्तित अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतों से काफी प्रभावित होती हैं। इसके अलावा, सोने पर घरेलू आयात शुल्क में कोई भी बदलाव भारतीय उपभोक्ताओं और निवेशकों के लिए अंतिम मूल्य को भी प्रभावित कर सकता है।
