फेडरल रिजर्व का फैसला तय करेगा बाजार की चाल
23 अप्रैल 2026 तक, गोल्ड फ्यूचर (Gold Futures) लगभग $4,750 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहे थे, वहीं सिल्वर फ्यूचर (Silver Futures) $77.66 प्रति औंस के करीब थे, दोनों में मामूली गिरावट आई। इस दौरान, एशियाई बाजारों में जापान और दक्षिण कोरिया जैसे इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में अस्थायी कमी, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सीजफायर बढ़ाने के फैसले के बाद, ने तत्काल सेफ-हेवन की मांग को कम कर दिया।
फिलहाल, बाजार की सबसे बड़ी नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के 29 अप्रैल को होने वाले पॉलिसी फैसले पर टिकी है। यह घोषणा बाजार की दिशा तय करेगी और अल्पावधि में कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकती है। हालांकि कूटनीति से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जारी तनाव और शांति वार्ता की कमी भू-राजनीतिक जोखिमों को बनाए हुए है। कच्चे तेल की कीमतें करीब $93 प्रति बैरल पर स्थिर रहीं। इससे लगता है कि आने वाले समय में प्रीशियस मेटल्स के लिए फेडरल रिजर्व की पॉलिसी, तत्काल भू-राजनीतिक घटनाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण ड्राइवर साबित होगी।
चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड बनाम सोने की सेफ-हेवन अपील
विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक सोना और चांदी को अलग-अलग कारणों से पसंद कर रहे हैं। सोने को अभी भी महंगाई और जियोपॉलिटिकल जोखिमों के खिलाफ एक हेज (Hedge) के रूप में खरीदा जा रहा है, और खासकर एशिया के सेंट्रल बैंक इसकी खरीदारी जारी रखे हुए हैं। हालांकि, बढ़ती रियल यील्ड (Real Yields) सोने की कीमतों में बड़ी तेजी को सीमित कर रही है।
दूसरी ओर, चांदी को वैश्विक आर्थिक ग्रोथ से ज्यादा जोड़ा जा रहा है। इसकी कीमतों को सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे उद्योगों से मजबूत डिमांड का सहारा मिला है। कुल चांदी की मांग का लगभग 59% से 61% इंडस्ट्रियल उपयोग से आता है, जिसमें अकेले सोलर पावर 29% इंडस्ट्रियल चांदी का इस्तेमाल करती है। इस मजबूत इंडस्ट्रियल सपोर्ट के कारण चांदी में सोने की पारंपरिक सेफ-हेवन भूमिका से अलग, एक ग्रोथ स्टोरी दिख रही है। मौजूदा हाई गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो (Gold-to-Silver Ratio) बताता है कि मीडियम टर्म में चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, खासकर जब अनिश्चितताओं के बीच ग्रोथ स्थिर हो रही हो। प्रमुख चांदी और सोने की माइनिंग कंपनियों का वैल्यूएशन भी देखने लायक है: पैन अमेरिकन सिल्वर (Pan American Silver - PAAS) का P/E रेशियो लगभग 22.9 और मार्केट कैप लगभग $24 बिलियन है; न्यूमोंट कॉर्पोरेशन (Newmont Corporation - NEM) का P/E रेशियो करीब 17-18.6 और मार्केट कैप $119 बिलियन से ऊपर है; बैरिक गोल्ड (Barrick Gold - GOLD) का P/E रेशियो 14.4 से 24.4 के बीच और मार्केट कैप $68 बिलियन से $98 बिलियन के बीच है।
जोखिम बने हुए हैं: फेड की आक्रामक पॉलिसी, भू-राजनीति और वोलेटिलिटी
चांदी की मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड के बावजूद, बाजार में कई बड़े जोखिम बने हुए हैं। अगर फेडरल रिजर्व उम्मीद से ज्यादा आक्रामक (Hawkish) पॉलिसी का संकेत देता है, तो रियल यील्ड तेजी से बढ़ सकती है, जो सोने और चांदी दोनों के लिए नुकसानदायक होगा। एक अधिक वोलेटाइल एसेट के तौर पर, चांदी ने ऐतिहासिक रूप से कीमतों में बड़ी उछाल देखी है, जिसमें 2025 में लगभग 120% की तेजी शामिल है।
भू-राजनीतिक तनाव, हालांकि फिलहाल कम हैं, एक बड़ा जोखिम बने हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास या अमेरिका-ईरान संबंधों में कोई भी नई वृद्धि तुरंत भावनाओं को सेफ-हेवन एसेट्स की ओर मोड़ सकती है। मैक्वेरी (Macquarie) ने प्रीशियस मेटल्स में अत्यधिक अस्थिरता (Volatility) देखी है, जहां कीमतों का उतार-चढ़ाव कभी-कभी फंडामेंटल्स से अलग दिखता है, जो एक नाजुक संतुलन का संकेत देता है। हाई गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो, भले ही चांदी के लिए संभावित लाभ का संकेत देता है, यह भी बताता है कि वर्तमान मूल्य अंतर बने रह सकते हैं, जिससे ऐतिहासिक औसत पर त्वरित वापसी की उम्मीद करने वालों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है।
कीमतों का अनुमान: पॉलिसी और डिमांड तय करेंगे आगे का रास्ता
विश्लेषकों को फेड के पॉलिसी संकेतों को पचाने और भू-राजनीतिक घटनाओं पर नजर रखने के साथ कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है। 2026 के लिए सोने के अनुमान आमतौर पर $4,300 से $4,700 प्रति औंस के बीच हैं, कुछ $5,000 की संभावना भी देख रहे हैं। चांदी की कीमतों में $65 प्रति औंस से ऊपर जाने की उम्मीद है, जिसमें सप्लाई की कमी और बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण $88 तक के टारगेट देखे जा रहे हैं। बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) और मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) जैसी संस्थाएं 2026 में प्रीशियस मेटल्स को लेकर बुलिश (Bullish) हैं, जिसका श्रेय सेंट्रल बैंक की खरीदारी और सेफ-हेवन डिमांड को दिया जा रहा है। बाजार सक्रिय रूप से कीमतों की खोज कर रहा है, जिसमें इंडस्ट्रियल डिमांड और मॉनेटरी पॉलिसी मुख्य प्रभाव डालने वाले कारक हैं।
