Gold-Silver Prices: फेडरल रिजर्व की चाल और डॉलर का जोर, सोने-चांदी में भारी गिरावट!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold-Silver Prices: फेडरल रिजर्व की चाल और डॉलर का जोर, सोने-चांदी में भारी गिरावट!
Overview

सोने और चांदी के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। सोमवार, 2 फरवरी 2026 को कीमती धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) में संभावित अध्यक्ष के तौर पर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम की अटकलें और मजबूत होता अमेरिकी डॉलर रहा, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

सोने-चांदी में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बड़ी गिरावट के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के अगले चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम की चर्चा सबसे बड़ी वजह है। वॉर्श को फेडरल रिजर्व में एक 'हॉकिश' (hawkish) यानी सख़्त मौद्रिक नीति के समर्थक के तौर पर देखा जाता है। उनकी नियुक्ति की अटकलों से डॉलर मजबूत हुआ और निवेशकों ने कीमती धातुओं से पैसा निकालना शुरू कर दिया।

डॉलर की मजबूती और कीमतों में भारी सेंध

सोमवार, 2 फरवरी 2026 को स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) की कीमत 1.5% गिरकर $4,793.97 प्रति औंस पर आ गई। यह पिछले शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को आई 9% से ज़्यादा की ऐतिहासिक गिरावट के बाद आई है। वहीं, चांदी (Silver) की हालत और भी खराब रही। चांदी की कीमतों में अपने ऑल-टाइम हाई (All-time High) से 25% से ज़्यादा की गिरावट आई और यह $87 प्रति औंस के नीचे कारोबार करने लगी। हाल ही में, सोने ने 29 जनवरी 2026 को लगभग $5,600 का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, जबकि चांदी जनवरी 2026 में $121.64 के ऑल-टाइम हाई पर पहुंची थी।

महंगाई और ब्याज दरों पर संकेत

दिसंबर 2025 के लिए जारी हुए यूएस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Producer Price Index) के आंकड़ों से पता चला है कि इंपोर्ट टैरिफ (Import Tariffs) के चलते महंगाई पांच महीने के सबसे तेज़ रफ़्तार से बढ़ी है। वहीं, बाजार प्रतिभागी 2026 में कम से कम दो बार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं। ऐतिहासिक तौर पर, सोना और अमेरिकी डॉलर एक-दूसरे के विपरीत चलते हैं - जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की मांग कम हो जाती है। वॉर्श के संभावित 'हॉकिश' रवैये से यह संकेत मिलता है कि फेडरल रिजर्व कम सख़्त मौद्रिक नीति अपना सकता है, जिसका सीधा फायदा डॉलर को होता है।

विश्लेषकों की राय बंटी हुई

विश्लेषकों की राय इस बारे में बंटी हुई है कि आगे कीमतें क्या रुख लेंगी। PL Capital के संदीप रायचुरा का मानना है कि शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, लेकिन लॉन्ग-टर्म में सोने का आउटलुक पॉजिटिव है और यह अगले दो सालों में $6,000 और मीडियम-टर्म में $8,000 तक पहुंच सकता है। हालांकि, उन्होंने चांदी को 'सेवियरली ओवरबॉट' (severely overbought) करार दिया और कहा कि यह $60 के स्तर तक गिर सकती है।

PL Wealth के राजकुमार सुब्रमण्यन ने चांदी की 25-35% की ऊंची सालाना वोलैटिलिटी (volatility) को देखते हुए एकमुश्त खरीदारी से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे खरीदारी करना जोखिम को कम करेगा। Lemonn Markets Desk के गौरव गर्ग का मानना है कि हालिया गिरावट एक हेल्दी कंसॉलिडेशन (healthy consolidation) है, लेकिन भारत में ऊंची कीमतों के चलते फिजिकल डिमांड (physical demand) कम हो गई है, जो शॉर्ट-टर्म में और हलचल पैदा कर सकती है। UBS ने सोने का टारगेट प्राइस $6,200 कर दिया है, जबकि J.P. Morgan ने 2026 की चौथी तिमाही तक सोने का औसत भाव $5,055/oz रहने का अनुमान लगाया है। चांदी के लिए कुछ विश्लेषकों ने 2026 में औसत $56 और संभावित रूप से $65 या $100 तक जाने का अनुमान लगाया है।

भारत में मांग और बाजार का आकार

रिकॉर्ड कीमतों के चलते 2025 में भारत में सोने की फिजिकल डिमांड वॉल्यूम (volume) के लिहाज़ से 11% गिरी, हालांकि कीमत के हिसाब से इसमें 30% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, भारत में निवेश मांग (investment demand) 40% से ज़्यादा बढ़ गई। 2025 तक, ग्लोबल गोल्ड मार्केट कैपिटलाइजेशन (Global Gold Market Capitalization) लगभग $33.088 ट्रिलियन था, जबकि सिल्वर मार्केट कैप लगभग $4.799 ट्रिलियन था।

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