Gold-Silver Price: डॉलर हुआ मजबूत, सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold-Silver Price: डॉलर हुआ मजबूत, सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट

अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में डॉलर के मजबूत होने से सोने की कीमत **0.46%** घटकर **$4,063.80** प्रति औंस पर आ गई। बढ़ती ब्याज दरों की आशंकाओं के बीच निवेशक अब अमेरिकी रोज़गार के आंकड़ों पर नज़रें टिकाए हुए हैं।

क्या हुआ?

2 जुलाई 2026 के शुरुआती कारोबार में सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अंतर्राष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड 0.46% लुढ़क कर $4,063.80 प्रति औंस पर पहुंच गया। Comex एक्सचेंज पर चांदी भी 0.16% गिरकर $60.41 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यह गिरावट अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के कारण आई है, जिससे डॉलर में मूल्यवान कीमती धातुएं अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए महंगी हो जाती हैं।

ब्याज दरों का कनेक्शन

सोने को अक्सर एक 'नॉन-यील्डिंग एसेट' (non-yielding asset) कहा जाता है क्योंकि यह कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं देता। जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ती हैं, तो निवेशक अक्सर उन संपत्तियों की ओर रुख करते हैं जो बेहतर रिटर्न देती हैं, जैसे कि बॉन्ड या बैंक डिपॉजिट। नतीजतन, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों को बनाए रखने या बढ़ाने की संभावना सोने की कीमतों पर दबाव डालती है, क्योंकि धातु को होल्ड करने की अवसर लागत (opportunity cost) बढ़ जाती है।

घरेलू बाज़ार का हाल

घरेलू बाज़ार में मिली-जुली चाल देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 1 जुलाई को, अगस्त अनुबंध के लिए गोल्ड फ्यूचर्स 0.03% की गिरावट के साथ ₹1,44,389 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। वहीं, सितंबर अनुबंध के लिए सिल्वर फ्यूचर्स 0.67% की तेज़ी के साथ ₹2,30,100 प्रति किलोग्राम पर बंद हुए। ये आंकड़े वैश्विक अंतर्राष्ट्रीय कीमतों की तुलना में भारतीय बाज़ार के भीतर मांग और आपूर्ति के विभिन्न कारकों को दर्शाते हैं।

अमेरिकी रोज़गार डेटा क्यों महत्वपूर्ण है?

बाज़ार के प्रतिभागी अब आगामी अमेरिकी आर्थिक रिपोर्टों पर करीब से नज़र रख रहे हैं, खासकर ADP रोज़गार परिवर्तन, नॉन-फार्म पेरोल (non-farm payrolls), और राष्ट्रीय बेरोज़गारी आंकड़े। ये संकेतक महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे फेडरल रिज़र्व के नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करते हैं। मज़बूत रोज़गार डेटा एक मज़बूत अर्थव्यवस्था का संकेत देता है, जो केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। इसके विपरीत, कमज़ोर रोज़गार डेटा दरों में कटौती की अटकलों को जन्म दे सकता है, जो आम तौर पर सोने की कीमतों के लिए सहायक होगा।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

बुल्लिंग (bullion) बाज़ार पर नज़र रखने वाले निवेशकों को कीमत की चाल में एक स्पष्ट रुझान के लिए आगामी अमेरिकी रोज़गार जारी होने वाले आंकड़ों पर नज़र रखनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, रुपए-डॉलर विनिमय दर और अंतर्राष्ट्रीय बुल्लिंग कीमतों के बीच का संबंध घरेलू MCX फ्यूचर्स को प्रभावित करता रहेगा। आने वाले सत्रों में सोने की मौजूदा तकनीकी सपोर्ट स्तरों (technical support levels) को बनाए रखने की क्षमता भी बाज़ार प्रतिभागियों के लिए एक महत्वपूर्ण कारक होगी।

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