महंगाई और ब्याज दरों का डबल अटैक
पिछले हफ्ते जहां सोने में करीब 3.7% और चांदी में 5.4% की भारी गिरावट आई थी, वहीं इस हफ्ते भी यह गिरावट जारी रही। दोनों कीमती धातुओं में 1.5% की और नरमी देखने को मिली है।
फेड का सख्त रवैया
बाजार के अनुमान से ज्यादा आए महंगाई के आंकड़े और कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ी हुई कीमतें, अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व को और सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर रही हैं। इसी वजह से US Treasury Yields में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे सोना-चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों (non-yielding assets) में निवेश कम आकर्षक हो गया है। निवेशक ब्याज दरों में कटौती के बजाय और अधिक बढ़ोतरी की उम्मीद लगा रहे हैं, जिसे बढ़ता हुआ US Dollar भी बल दे रहा है। सुरक्षित माने जाने वाले इन एसेट्स (safe-haven assets) से निवेश का हटना, बाजार की पहले की उम्मीदों के विपरीत है, जहां मॉनेटरी ईजिंग (monetary easing) की उम्मीद थी।
भारत से कमजोर मांग, सोने पर असर
सोने के लिए एक और बड़ी चुनौती भारत से आती हुई सुस्त मांग है। भारत, जो दुनिया में सोने का एक बड़ा खरीदार है, वहां इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) में बदलाव और अन्य नीतिगत समायोजनों के कारण मांग का आउटलुक कमजोर दिख रहा है। ऐतिहासिक तौर पर, भारतीय ग्राहकों का व्यवहार वैश्विक सोने की कीमतों को काफी प्रभावित करता है, ऐसे में किसी भी तरह की कमजोरी कीमतों पर दबाव बना सकती है।
चांदी को औद्योगिक मांग का सहारा
चांदी की कीमतों का समीकरण थोड़ा अलग है। हाल में AI और डेटा सेंटरों से जुड़ी मांग की अटकलों के चलते इसमें तेजी आई थी, लेकिन अब कीमतें गिर गई हैं। सोने के विपरीत, चांदी का इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे उद्योगों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। यह औद्योगिक मांग चांदी को एक फंडामेंटल सपोर्ट देती है और मौजूदा गिरावट के बावजूद, इसके लॉन्ग-टर्म आउटलुक को मजबूत बनाती है।
आगे की राह और अहम इवेंट्स
इंटरनेशनल स्पॉट गोल्ड (International Spot Gold) फिलहाल $4,475 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जो साल की शुरुआत के अपने उच्चतम स्तर से करीब 15% नीचे है। यह धातु अपनी हालिया ट्रेडिंग रेंज के निचले सिरे के करीब है, जिससे भू-राजनीतिक तनाव कम होने पर छोटी अवधि में उछाल आ सकता है। हालांकि, मौजूदा मॉनेटरी पॉलिसी का माहौल गिरावट की ओर इशारा कर रहा है। चांदी $73.5 प्रति औंस के करीब है, और यहां भी ऊंची ब्याज दरें औद्योगिक गतिविधि को धीमा कर सकती हैं, जिससे कीमतें दबाव में हैं। बाजार के प्रतिभागी फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतिगत दिशा के संकेतों के लिए FOMC Meeting Minutes का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो इस विचार को मजबूत कर सकते हैं कि ब्याज दरों में कटौती अभी दूर है और कीमती धातुओं पर दबाव बना रहेगा।
