Gold, Silver Prices: अमेरिका के डेटा से बदली ब्याज दरों की चाल, सोना-चांदी ₹1.52 लाख के पार!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold, Silver Prices: अमेरिका के डेटा से बदली ब्याज दरों की चाल, सोना-चांदी ₹1.52 लाख के पार!

अमेरिका से आए कमजोर रोज़गार आंकड़ों के बाद सोने और चांदी की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल आया है। इंटरनेशनल मार्केट में सोना करीब **$4,341** प्रति औंस तक पहुंच गया है, वहीं MCX पर फ्यूचर **₹1.52 लाख** के करीब कारोबार कर रहे हैं। इस तेज़ी के चलते बाज़ार अब ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिज़र्व के रुख पर नए सिरे से दांव लगा रहे हैं। हालांकि, ऊंची कीमतों के चलते एशियाई बाज़ारों में फिजिकल डिमांड पर असर दिख रहा है।

बाज़ार में आई तूफानी तेज़ी!

सोना और चांदी के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स में ग्लोबल और भारतीय, दोनों बाज़ारों में ज़बरदस्त तेजी देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,51,985 प्रति 10 ग्राम के करीब ट्रेड कर रहे हैं। वहीं, सिल्वर फ्यूचर्स करीब ₹2,31,804 प्रति किलोग्राम तक चढ़ गए हैं। इंटरनेशनल बाज़ार की बात करें तो सोना $4,341 प्रति औंस के करीब बना हुआ है, और चांदी $62 से $64 प्रति औंस के बीच कारोबार कर रही है।

तेज़ी की मुख्य वजह?

इस तेज़ी का सबसे बड़ा कारण अमेरिका से आए कमज़ोर नॉन-फार्म पेरोल (Non-farm Payrolls) डेटा है। इकोनॉमिस्ट्स की उम्मीद से कम नौकरियां पैदा होने के संकेत ने अमेरिका के सेंट्रल बैंक, फेडरल रिज़र्व की मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बाज़ार की उम्मीदों को बदल दिया है। जब इकोनॉमी की ग्रोथ धीमी होती है और जॉब रिपोर्ट उम्मीद से कमज़ोर आती है, तो यह माना जाता है कि सेंट्रल बैंक आक्रामक तरीके से ब्याज दरें (Interest Rates) नहीं बढ़ाएगा। कम ब्याज दरें सोने जैसी धातुओं के लिए अक्सर अच्छी मानी जाती हैं, क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, जिससे यह बॉन्ड जैसी यील्ड देने वाली एसेट्स की तुलना में ज़्यादा आकर्षक हो जाता है।

डॉलर और यील्ड में गिरावट का साथ

इस तेज़ी को कमजोर होते अमेरिकी डॉलर और यूएस ट्रेजरी यील्ड (US Treasury Yields) में गिरावट का भी साथ मिल रहा है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे ग्लोबल डिमांड बढ़ सकती है। इसके अलावा, सरकारी बॉन्ड यील्ड में कमी आने से प्रीशियस मेटल्स (Precious Metals) को रखने की 'अपॉर्च्युनिटी कॉस्ट' (Opportunity Cost) भी कम हो जाती है, क्योंकि निवेशकों को ऐसा महसूस नहीं होता कि उन्हें अपना पैसा सुरक्षित, ब्याज देने वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाना चाहिए।

फिजिकल डिमांड पर असर

इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, बाज़ार में फिजिकल डिमांड को लेकर कुछ चिंताएं भी हैं। भारत और चीन जैसे प्रमुख उपभोक्ता देशों में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की वजह से रिटेल डिमांड धीमी पड़ रही है। खरीदार ज़्यादा सतर्क हो गए हैं, और इस ऊंचे भाव पर ज्वेलरी और सिक्के खरीदने में हिचकिचाहट दिख रही है। अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो फिजिकल कंजम्पशन में यह नरमी कीमतों में और उछाल पर ब्रेक लगा सकती है।

आगे क्या?

मार्केट एनालिस्ट्स (Market Analysts) कीमतों के ऐतिहासिक रुकावटों (Historical Barriers) के पास कैसा प्रदर्शन करती हैं, इस पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। सोने ने हाल के मूविंग एवरेज (Moving Averages) के ऊपर ट्रेड करके मजबूती दिखाई है, जो एक पॉजिटिव ट्रेंड का संकेत देता है। हालांकि, अगर ट्रेडर्स मुनाफावसूली (Profit-taking) करते हैं, तो अल्पावधि में कीमतों में गिरावट की संभावना बनी हुई है। चांदी में भी मज़बूत वापसी हुई है, लेकिन यह उन स्तरों पर संघर्ष कर रही है जहाँ यह पहले भी बढ़ने में कठिनाई का सामना कर चुकी है।

आने वाले दिनों में प्रीशियस मेटल्स की दिशा काफी हद तक आने वाले इकोनॉमिक इंडिकेटर्स (Economic Indicators) और सेंट्रल बैंक ऑफिशियल्स के बयानों पर निर्भर करेगी। निवेशक और ट्रेडर्स अमेरिकी लेबर मार्केट और महंगाई (Inflation) पर किसी भी फर्दर कन्फर्मेशन का इंतज़ार करेंगे, जो यह तय करेगा कि मौजूदा मोमेंटम बना रहेगा या बाज़ार में कंसॉलिडेशन (Consolidation) का दौर देखने को मिलेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.