वैश्विक बाजारों में कीमती धातुओं में लगातार तीसरे दिन तेजी देखी गई। स्पॉट गोल्ड की कीमत **1%** से बढ़कर **$4,178** प्रति औंस पर पहुंच गई। वहीं, भारतीय वायदा बाजार MCX पर सोने का फ्यूचर **₹1,45,723** प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस चाल का असर घरेलू सर्राफा की कीमतों पर भी दिख रहा है।
क्या हुआ?
शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार उछाल आया। वैश्विक बाजारों में मांग बढ़ने का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिख रहा है। स्पॉट गोल्ड की कीमतों में 1.3% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई, जो $55 बढ़कर $4,178.28 प्रति औंस पर पहुंच गई। यह लगातार तीसरा दिन है जब सोने में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी दर्ज की गई है। चांदी की कीमतों में भी करीब 2% का इजाफा हुआ और यह $62 प्रति औंस के पार निकल गई। भारत में, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का फ्यूचर ₹1,45,723 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी का फ्यूचर करीब ₹2,29,691 प्रति किलोग्राम रहा।
घरेलू कीमतें और बेंचमार्क
भारत में सोने और चांदी की खुदरा कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय रुझानों से जुड़ी होती हैं, हालांकि स्थानीय टैक्स, आयात शुल्क और मेकिंग चार्जेस के कारण अलग-अलग शहरों जैसे दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और कोलकाता में कीमतों में थोड़ा अंतर देखा जा सकता है। इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (IBJA) अभी भी प्रमुख बेंचमार्क बना हुआ है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, 24-कैरेट सोने की कीमत ₹1,43,000 से ₹1,43,340 प्रति 10 ग्राम के बीच रही है।
निवेशकों के लिए ग्लोबल ट्रेंड क्यों मायने रखता है?
भारतीय निवेशकों के लिए, बुलियन की कीमतों में यह उछाल अक्सर वैश्विक मैक्रोइकॉनॉमिक कारणों, जैसे सेंट्रल बैंक की नीतियां, करेंसी में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की मांग का नतीजा होता है। जब अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत में भी कीमतें उसी के अनुरूप बढ़ती हैं, भले ही स्थानीय मांग कम हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत सोने का एक बड़ा आयातक देश है। निवेशक इन कीमतों पर पैनी नजर रखते हैं क्योंकि ये सीधे तौर पर ज्वेलरी रिटेलरों के मार्जिन और देश के इंपोर्ट बिल को प्रभावित करते हैं, जिसका असर व्यापार संतुलन पर पड़ सकता है।
जोखिम और बाजार की संवेदनशीलता
जहां कीमती धातुओं को अक्सर आर्थिक अनिश्चितता के खिलाफ एक बचाव माना जाता है, वहीं मौजूदा ऊंची कीमतें अपने साथ खास जोखिम लेकर आती हैं। सोने के ऊंचे दाम भारतीय उपभोक्ताओं के बीच फिजिकल डिमांड को ठंडा कर सकते हैं, जो भारी उतार-चढ़ाव या रिकॉर्ड ऊंचाई के दौरान खरीदारी टाल सकते हैं। इसके अलावा, अगर उपभोक्ता ऊंची कीमतों के कारण खरीदारी से कतराते हैं, तो ज्वेलरी व्यवसायों को अपने इन्वेंट्री की लागत और बिक्री की मात्रा में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। गोल्ड फाइनेंस या ज्वेलरी रिटेल सेक्टर की कंपनियों पर नजर रखने वाले निवेशकों को इन मूल्य रुझानों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि लगातार ऊंची लागत उपभोक्ता भावना को प्रभावित कर सकती है, और नतीजतन, कंपनियों के रेवेन्यू को भी।
