गुरुवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया, जिसके चलते कीमती धातुओं (Precious Metals) में अच्छी खासी तेजी देखी गई। सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम होने से निवेशकों की सोच बदली है।
अमेरिकी फेड के फैसले का असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को जस का तस बनाए रखने के फैसले के बाद गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया। COMEX गोल्ड फ्यूचर्स (Gold Futures) 1.23% बढ़कर $4,085.80 प्रति औंस पर पहुंच गया, वहीं COMEX सिल्वर फ्यूचर्स (Silver Futures) 1.10% की बढ़त के साथ $58.730 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यह तेजी केंद्रीय बैंक के अपने बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट्स को वर्तमान स्तरों पर बनाए रखने के निर्णय पर बाजार की प्रतिक्रिया को दर्शाती है।
निवेशकों को मिला संकेत
फेड चेयर केविन वॉर्श ने महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने की बात कही, लेकिन भविष्य की नीतिगत बदलावों के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं बताई। इस अनिश्चितता के चलते ट्रेडर्स ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया है। CME ग्रुप के FedWatch Tool के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में दरें बढ़ने की संभावना घटकर करीब 57% रह गई है, जो पहले 81% थी।
जानकारों का मानना है कि जब ब्याज दरें कम होती हैं या स्थिर रहती हैं, तो सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं को रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) कम हो जाती है, जिससे इनकी कीमतों को सहारा मिलता है।
भू-राजनीतिक तनावों का भी असर
ब्याज दरों के अलावा, लगातार बने हुए भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical Tensions) ने भी सुरक्षित-निवेश (Safe-Haven Assets) माने जाने वाले कीमती धातुओं की मांग को बढ़ाया है। मिस्र में अमेरिकी जहाज पर हुए हमले और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव की खबरों ने निवेशकों को वैश्विक अस्थिरता के खिलाफ बचाव के तौर पर सोने-चांदी में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया है।
आगे क्या?
अब निवेशकों की निगाहें जून के लिए अमेरिका के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर टिकी हैं। फेडरल रिजर्व इसे महंगाई मापने का एक अहम पैमाना मानता है और यह आगामी नीतिगत फैसलों को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की आगामी बैठकों पर भी नजर रखी जाएगी, जहां मौजूदा ब्याज दरों को बनाए रखने की उम्मीद है।
