कच्चे तेल के दाम आसमान पर, सोने-चांदी पर गिरी गाज
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जबरदस्त उछाल ने ग्लोबल मार्केट में खलबली मचा दी है। भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions), खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत टूटने जैसी खबरों के चलते क्रूड ऑयल $104 प्रति बैरल के पार निकल गया। इस महंगाई को भड़काने वाली स्थिति के कारण अब बाजार को यह उम्मीद कम है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) जल्द ही इंटरेस्ट रेट कट करेगा।
इस अनिश्चितता का सीधा असर नॉन-यील्डिंग एसेट्स यानी सोने (Gold) और चांदी (Silver) पर पड़ा है। एमसीएक्स (MCX) पर सोना ₹1,239 गिरकर ₹1,51,413 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹5,986 टूटकर ₹2,37,288 प्रति किलोग्राम पर आ गई। महंगाई बढ़ने की आशंका से फिक्स्ड इनकम वाले निवेश, जैसे बॉन्ड, ज्यादा आकर्षक लगने लगे हैं, जिससे कीमती धातुओं में बिकवाली बढ़ी है।
इसके अलावा, एनर्जी की बढ़ती लागत से भारतीय रुपये (Indian Rupee) पर भी दबाव आने की आशंका है, जो हाल ही में कुछ स्थिर हुआ था। इससे फाइनेंशियल मार्केट्स में एक और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
सुरक्षित निवेश की भूमिका पर सवाल?
आम तौर पर सोना महंगाई और जियोपॉलिटिकल चिंताओं के खिलाफ एक 'सेफ हेवन' (Safe Haven) यानी सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार बाजार का रिएक्शन थोड़ा अलग दिख रहा है। यह अस्थिरता सीधे तौर पर इकोनॉमी पर असर डाल रही है। कूटनीतिक वार्ताओं के टूटने से निवेशक रिस्की एसेट्स से दूर भाग रहे हैं, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और इन्फ्लेशन की चिंताएं गहरा रही हैं। यह ऐसी स्थिति है जो रेट कट को और टाल सकती है। पिछले सालों में ऐसी भू-राजनीतिक घटनाओं से सोने में थोड़ी तेजी आती थी, पर अब ऊंची तेल कीमतों और सेंट्रल बैंक की टाइट पॉलिसी के चलते सोने की ग्रोथ सीमित हो गई है। एनालिस्ट्स का कहना है कि भले ही जियोपॉलिटिकल रिस्क एक फंडामेंटल फैक्टर है जो सोने को सपोर्ट करता है, पर निवेशक अभी जिद्दी इन्फ्लेशन और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की संभावना से ज्यादा चिंतित हैं। यूएस डॉलर (US Dollar) की मजबूती भी सोने पर दबाव बना रही है।
आगे क्या है जोखिम?
सोने और चांदी के भविष्य पर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और उसके ग्लोबल इकोनॉमिक पॉलिसी पर पड़ने वाले असर से जुड़े बड़े जोखिम हैं। मिडिल ईस्ट में जारी अस्थिरता से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, जिससे इन्फ्लेशन भी ऊंचा रहेगा। ऐसे में फेडरल रिजर्व जैसे सेंट्रल बैंक अपनी ब्याज दरें ऊंची रख सकते हैं या रेट कट में देरी कर सकते हैं, जिससे सोना और चांदी जैसे निवेश कम आकर्षक हो जाएंगे। इसके अलावा, ट्रेड टेंशन या अचानक होने वाली भू-राजनीतिक घटनाएं ऐसे जोखिम पैदा कर सकती हैं कि निवेशक यूएस डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करें। गिरता हुआ भारतीय रुपया इंपोर्टेड इन्फ्लेशन के जोखिम और देश से पैसे बाहर जाने की संभावना को दर्शाता है, जो घरेलू मार्केट को और कमजोर कर सकता है।
एक्सपर्ट्स की राय: इन लेवल्स पर रखें नजर
एनालिस्ट्स सतर्क बने हुए हैं। उनका मानना है कि सोने और चांदी की नियर-टर्म डायरेक्शन जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट, कच्चे तेल की कीमतों और सेंट्रल बैंक के रिएक्शन पर निर्भर करेगी। मौजूदा प्राइस लेवल पर डिमांड सीमित दिख रही है। सोने के लिए ₹1,54,000 का लेवल रेजिस्टेंस (Resistance) का काम कर सकता है, जबकि ₹1,51,000 सपोर्ट (Support) का। वहीं, चांदी के लिए ₹2,40,000 पर रेजिस्टेंस और ₹2,37,000 पर सपोर्ट देखा जा रहा है। इन सपोर्ट लेवल्स से नीचे गिरने पर सोना ₹1,48,000 और चांदी ₹2,33,000 तक गिर सकती है। जियोपॉलिटिकल सेंटीमेंट में कोई बड़ा बदलाव या इंटरेस्ट रेट्स के टाइमिंग पर स्पष्ट संकेत अगले मूव के लिए अहम होंगे।