Gold Silver Prices: Fed के डर और बजट के झटके से लुढ़के दाम, निवेशकों में घबराहट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold Silver Prices: Fed के डर और बजट के झटके से लुढ़के दाम, निवेशकों में घबराहट
Overview

2 फरवरी 2026 को कीमती धातुओं (Precious Metals) के बाजार में भारी उथल-पुथल देखी गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) के नए प्रमुख के नाम के ऐलान और भारत में बजट के बाद आई अनिश्चितता के चलते सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई, जबकि चांदी ने बाद में कुछ रिकवरी भी दिखाई।

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ग्लोबल झटकों से मचा हाहाकार!

2 फरवरी 2026 का दिन सोने और चांदी के निवेशकों के लिए किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा केविन वार्श को फेडरल रिजर्व (Fed) का नया चेयरमैन नियुक्त करने की खबर आई, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और कमोडिटी मार्केट हिल गया। वहीं, भारत में पेश हुए यूनियन बजट 2026 से भी कीमतों पर असर पड़ा।

इन दो बड़े डेवलपमेंट के चलते, स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) में जहां पहले 4% की बड़ी गिरावट आई, वहीं एशियाई ट्रेडिंग सत्रों में यह करीब 1% तक सुधर गया। चांदी (Silver) की चाल तो और भी ज्यादा नाटकीय रही, जिसमें पहले करीब 12% की भारी गिरावट देखी गई, लेकिन बाद में यह 8% से ज्यादा उछलकर $84.140 के आसपास कारोबार करने लगी।

MCX पर भी दिखी गिरावट, बजट से नहीं मिली राहत

भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी कीमती धातुओं के फ्यूचर्स (Futures) में भारी गिरावट दर्ज की गई। रविवार, 1 फरवरी 2026 को, यूनियन बजट 2026 के दिन, अप्रैल गोल्ड फ्यूचर्स 2.9% यानी ₹4,242 की गिरावट के साथ ₹1,48,104 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। वहीं, मार्च सिल्वर फ्यूचर्स 9% के लोअर सर्किट (Lower Circuit) पर लगे और ₹26,273 की भारी गिरावट के साथ ₹2,65,652 प्रति किलोग्राम पर बंद हुए।

सोमवार को बाजार खुलने पर चांदी फ्यूचर्स ने 8% से अधिक की जोरदार वापसी की, जबकि गोल्ड फ्यूचर्स में भी कुछ सुधार देखने को मिला।

यूनियन बजट 2026 में सोने और चांदी के आयात पर मौजूदा कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) को बनाए रखा गया। इस फैसले से बुलियन मार्केट को कोई तत्काल राहत या बूस्ट नहीं मिला। बाजार को उम्मीद थी कि ड्यूटी दरों में कोई बदलाव हो सकता है, खासकर 2025 में भारत के सोने और चांदी के आयात में आई तेजी को देखते हुए, जिसने ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) और रुपये पर दबाव बढ़ाया था।

फेड नॉमिनेशन का डॉलर पर असर

केविन वार्श की फेडरल रिजर्व के प्रमुख के तौर पर नियुक्ति की उम्मीदों ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत किया है। एक मजबूत डॉलर आम तौर पर डॉलर-डिनोमिनेटेड कमोडिटीज जैसे सोना और चांदी पर दबाव डालता है, क्योंकि वे अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं। यह करेंसी की चाल निवेशकों के लिए एक और चिंता का विषय बन गई है।

ऐतिहासिक उथल-पुथल और आयात की चिंता

यह हालिया प्राइस स्विंग (Price Swing) बाजार में पहले भी देखी गई तीव्र उथल-पुथल की याद दिलाता है। चांदी में शुक्रवार को आई गिरावट मार्च 1980 के बाद की सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट थी। विश्लेषक इस तुलना को नोट कर रहे हैं, क्योंकि सोने-चांदी के अनुपात में तेज गिरावट के बाद अक्सर अस्थिरता या बड़ी करेक्शन देखी गई है। भारत में सोने के आयात पर कस्टम ड्यूटी का इतिहास (जैसे 2013 में रुपये के संकट के दौरान ड्यूटी बढ़ाना) बाजार की बजट घोषणाओं पर नजर रखने के महत्व को दर्शाता है। 2025 में रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद, भारत में सोने-चांदी की मांग मजबूत बनी रही, जिससे आयात और ट्रेड डेफिसिट पर असर पड़ा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.