Gold, Silver Prices Jump: ग्लोबल टेंशन और भारत के टैरिफ झटके से सोना-चांदी की ऊंची उड़ान!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gold, Silver Prices Jump: ग्लोबल टेंशन और भारत के टैरिफ झटके से सोना-चांदी की ऊंची उड़ान!
Overview

सोने और चांदी की कीमतों में आज जोरदार तेजी देखी गई। निवेशक बढ़ते ग्लोबल टेंशन और लगातार बनी हुई महंगाई की चिंताओं से सुरक्षित निवेश की ओर भागे। सोने का भाव **$4,713.90** प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि चांदी ने और भी शानदार प्रदर्शन करते हुए **$87.865** का स्तर छुआ।

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ग्लोबल डर और डोमेस्टिक पॉलिसी का डबल अटैक!

कीमती धातुओं, यानी सोना और चांदी, में बुधवार, 13 मई 2026 को जबरदस्त उछाल देखा गया। इसकी दोहरी वजहें थीं - दुनिया भर की चिंताएं और भारत सरकार के बड़े नीतिगत बदलाव। COMEX पर सोने की कीमत 0.58% बढ़कर $4,713.90 प्रति औंस हो गई, और दिन के कारोबार में तो यह $4,734.80 तक भी जा पहुंची। चांदी ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया, जिसकी कीमत 2.66% उछलकर $87.865 प्रति औंस पर पहुंच गई, और इसने $88.580 का उच्चतम स्तर भी छुआ। यह तेजी साफ बताती है कि ऐसे माहौल में जहां जियोपॉलिटिकल रिस्क (भू-राजनीतिक जोखिम) बहुत ज्यादा है और महंगाई लगातार बनी हुई है, निवेशक सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग रहे हैं।

इन वजहों से चढ़ा भाव

बाजार में यह सावधानी का माहौल कई अनिश्चितताओं के चलते है। अमेरिका और चीन के बीच होने वाली समिट (Summit) को लेकर चल रही अटकलें, पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर मंडरा रहे खतरे, ये सब सोने और चांदी की मांग को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही, फेडरल रिजर्व में केविन वॉर्श (Kevin Warsh) का गवर्नर के तौर पर कन्फर्म होना भी भविष्य की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को लेकर उत्सुकता बढ़ा रहा है। वॉर्श का पहले से ही महंगाई को काबू में रखने पर जोर रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि भविष्य में कीमतों को स्थिर रखने पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है।

एक बड़ा डोमेस्टिक (घरेलू) फैक्टर भी रहा - भारत सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) को अचानक 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है, जो 13 मई 2026 से लागू हो गया। इस कदम का मकसद देश में खरीदारी को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) पर पड़ रहे दबाव को हल्का करना है। इससे कीमती धातुओं के बाजार में एक मिला-जुला माहौल बन गया है; जहां एक तरफ ग्लोबल घटनाएं सुरक्षित निवेश की ओर धकेल रही हैं, वहीं भारत की पॉलिसी मांग को कम करने की कोशिश कर रही है, जो कीमतों और व्यापार के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से अपने ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) और करेंसी को मैनेज करने के लिए ऐसे ड्यूटी एडजस्टमेंट किए हैं।

इस बीच, अमेरिका के महंगाई के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल में कंज्यूमर प्राइस (Consumer Price) उम्मीद से ज्यादा बढ़ी है, जो करीब तीन साल की सबसे तेज सालाना बढ़ोतरी है - 3.8%। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण एनर्जी की ऊंची कीमतों से बढ़ी यह लगातार महंगाई, बाजार की इस उम्मीद को मजबूत करती है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। 2026 में फेड रेट कट्स (Fed Rate Cuts) की उम्मीदें अब और पीछे खिसक गई हैं; कुछ विश्लेषकों का कहना है कि 2027 के आखिर तक कोई कटौती नहीं होगी, और ट्रेडर्स तो किसी भी नरमी से पहले रेट हाइक (Rate Hike) की भी संभावना देख रहे हैं। यह स्थिति, जहां दरें ऊंची बनी रहती हैं, अक्सर सोने को महंगाई के खिलाफ एक हेज (Hedge) के रूप में और आकर्षक बना देती है।

इसकी तुलना में, बुधवार को तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) करीब $107 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो तीन दिनों की बढ़त के बाद आया। विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि तेल की कीमतें सप्लाई की चिंताओं के कारण अभी भी मजबूत हैं, लेकिन कीमती धातुएं फिलहाल जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम और महंगाई से सुरक्षा की मांग से ज्यादा फायदा उठा रही हैं। एक्सपर्ट पृथ्वीराज कोठारी का अनुमान है कि सोना $4,800–$4,850 के दायरे को छू सकता है और चांदी $90 प्रति औंस तक जा सकती है, जो पॉजिटिव टेक्निकल सिग्नल (Technical Signal) दे रहे हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.