सोना-चांदी में तूफानी तेजी! एक महीने की ऊंचाई पर पहुंचे दाम, जानें वजह

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
सोना-चांदी में तूफानी तेजी! एक महीने की ऊंचाई पर पहुंचे दाम, जानें वजह

5 अगस्त 2026 को सोना और चांदी की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल देखा गया। घरेलू बाज़ार में सोने के दाम ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गए। यह तेज़ी अमेरिका-ईरान के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर कूटनीतिक प्रगति की उम्मीदों से ऊर्जा मुद्रास्फीति (energy inflation) के कम होने के संकेतों के बाद आई है।

क्यों आई कीमती धातुओं में तेज़ी?

बुधवार, 5 अगस्त 2026 को कीमती धातुओं, सोना और चांदी, की कीमतों में जबरदस्त तेज़ी दर्ज की गई। दोनों ही धातुएं पिछले एक महीने के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। भारत में, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतें ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार करने की ओर बढ़ीं। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी स्पॉट गोल्ड (spot gold) की कीमतों में उछाल आया और यह $4,200 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया।

वैश्विक राहत और मुद्रास्फीति का खेल

इस तेज़ी का मुख्य कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक बाज़ार में सुधरा हुआ भरोसा है। अमेरिका और ईरान के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर संभावित कूटनीतिक प्रगति की ख़बरों से तेल की कीमतों में अचानक उछाल आने की चिंता कम हो गई है। चूंकि तेल वैश्विक मुद्रास्फीति (global inflation) का एक बड़ा कारक है, इसलिए ऊर्जा लागत में कमी की उम्मीदों ने मुद्रास्फीति पर दबाव घटाया है, जो आमतौर पर सोने की कीमतों के लिए सकारात्मक होता है।

RBI का फैसला और निवेशक

घरेलू मोर्चे पर, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी 5 अगस्त 2026 को अपनी नवीनतम नीतिगत घोषणा की, जिसमें रेपो रेट (repo rate) को 5.25% पर स्थिर रखा गया। ब्याज दरों का स्थिर माहौल, महंगाई संबंधी चिंताओं में कमी के साथ मिलकर, सोने में निवेशक के व्यवहार को अक्सर प्रभावित करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब व्यापक आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोने को मूल्य के भंडार (store of value) के रूप में देखा जाता है।

आगे क्या?

हालांकि, कमोडिटी बाज़ार (commodity market) भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है। मौजूदा तेज़ी इस धारणा पर आधारित है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में कूटनीतिक प्रयास ऊर्जा जोखिम को कम करना जारी रखेंगे। यदि इन वार्ताओं में कोई बाधा आती है या भू-राजनीतिक तनाव फिर से बढ़ता है, तो ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे कीमती धातुओं के बाज़ार में फिर से अस्थिरता आ सकती है।

जो निवेशक इन कमोडिटीज़ पर नज़र रख रहे हैं, वे आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, जैसे रोज़गार और पेरोल (payroll) के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इन संकेतकों से फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) के भविष्य के ब्याज दर के रास्ते के बारे में और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है, जो आने वाले हफ्तों में सोने और चांदी की कीमतों की चाल को एक प्रमुख कारक बनाए रखेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.