दिल्ली में सोने का भाव **₹400** घटकर **₹1,49,200** प्रति 10 ग्राम पर आ गया, वहीं चांदी में **₹300** की गिरावट के साथ यह **₹2,29,700** प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। इस गिरावट की मुख्य वजह मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई **6%** की भारी उछाल है।
Detailed Coverage
कच्चे तेल में आई तूफानी तेजी और निवेशकों की चिंता
गुरुवार को बुलियन मार्केट में गिरावट देखने को मिली, जिसकी सीधी वजह ग्लोबल एनर्जी की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी है। दिल्ली में सोने के भाव में ₹400 की गिरावट आई और यह ₹1,49,200 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, चांदी की कीमतों में ₹300 की कमी आई और यह ₹2,29,700 प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी सोने के स्पॉट प्राइस में 1% की गिरावट आई और यह $4,091.17 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तूफानी तेजी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 6% बढ़कर $99.51 प्रति बैरल पर पहुँच गई। मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर लाल सागर में शिपिंग पर हुए हमलों की खबरों के चलते यह तेजी आई है। इतिहास गवाह है कि जब भी कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं। निवेशकों को डर है कि बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए अमेरिका का फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) जैसे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं।
ब्याज दरों की उम्मीदों का असर
सोना एक ऐसा एसेट है जिस पर कोई नियमित ब्याज या रिटर्न नहीं मिलता। ऐसे में, जब ब्याज दरों के ऊंचा रहने या और बढ़ने की उम्मीदें बढ़ती हैं, तो बॉन्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी ब्याज देने वाली संपत्तियों की तुलना में सोने का आकर्षण कम हो जाता है। मौजूदा बाजार का माहौल ऐसा है जहां निवेशक सोने की सेफ-हेवन (सुरक्षित निवेश) वाली अपील और संभावित मॉनेटरी पॉलिसी टाइटनिंग (मौद्रिक नीति को सख्त करने) के दबाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, संघर्ष के समय में सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन फिलहाल बाजार में मुनाफावसूली और महंगाई-आधारित ब्याज दर बढ़ोतरी के डर का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है।
अहम स्तर और बाजार का रुख
बाजार के जानकार अंतर्राष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड प्राइस पर कड़ी नजर रख रहे हैं, जहाँ $4,000 प्रति औंस का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल माना जा रहा है। चांदी की कीमतों में भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करीब 2% की गिरावट आई है और यह $58.65 प्रति औंस पर है। जैसे-जैसे मध्य-पूर्व की स्थिति विकसित हो रही है, निवेशकों का मुख्य ध्यान एनर्जी मार्केट्स में और अधिक अस्थिरता की संभावना पर है। नीति निर्माताओं से सावधानी बरतने की उम्मीद है, और ब्याज दरों की दिशा या ऊर्जा सुरक्षा उपायों पर कोई भी आधिकारिक अपडेट कीमती धातुओं के भविष्य के रुझानों को प्रभावित करेगा। आने वाले हफ्तों में इन कमोडिटीज की दिशा का अंदाजा लगाने के लिए निवेशक आगामी ग्लोबल इन्फ्लेशन डेटा और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की टिप्पणियों पर नजर रखेंगे।
