Global मार्केट में डॉलर की मजबूती और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के चलते Gold और Silver में भारी गिरावट देखी जा रही है। US Treasury Yields के **5%** के पार जाने से निवेशकों का रुझान नॉन-यिल्डिंग मेटल्स से कम हो रहा है, जिसका सीधा असर भारत में त्योहारी मांग पर भी पड़ा है।
अक्टूबर 2026 की शुरुआत प्रीशियस मेटल्स के लिए चुनौतीपूर्ण रही है। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह डॉलर इंडेक्स में आया उछाल है, जिससे डॉलर में डिनॉमिनेट होने वाले मेटल्स की चमक फीकी पड़ गई है। इसके साथ ही, 5% से ऊपर चल रही US Treasury Yields ने निवेशकों को सोने से दूर कर दिया है, क्योंकि बॉन्ड से अब बेहतर रिटर्न मिल रहा है।
क्यों दबाव में हैं कीमतें?
पारंपरिक रूप से सोना हमेशा से 'सेफ हेवन' माना जाता है, लेकिन मौजूदा मार्केट सेंटीमेंट में यह पूरी तरह 'रेट-सेंसिटिव' एसेट बन चुका है। US और ईरान के बीच बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ा है। इसका सीधा असर US Federal Reserve की पॉलिसी पर पड़ेगा, जहां ब्याज दरों के और बढ़ने की आशंका ने कमोडिटी मार्केट को डरा दिया है।
भारतीय बाजार का हाल (MCX Update)
घरेलू बाजार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना ₹147,000 से ₹149,000 प्रति 10 ग्राम के बीच ट्रेड कर रहा है। हालांकि, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई कमजोरी ने गिरावट को थोड़ा सीमित जरूर रखा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमजोरी के सामने यह नाकाफी साबित हो रहा है।
त्योहारी सीजन होने के बावजूद, भारत में फिजिकल गोल्ड की डिमांड काफी 'म्यूटेड' (कमजोर) बनी हुई है। खरीदार बाजार में स्टेबिलिटी का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, Silver में गोल्ड के मुकाबले ज्यादा वोलैटिलिटी (Volatility) देखी जा रही है, जिसका कारण सप्लाई-डिमांड का असंतुलन है। निवेशकों की नजर अब अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अगले फैसलों पर टिकी है।
