Gold, Silver Prices: सोने-चांदी में गिरावट जारी, MCX गोल्ड ₹1.55 लाख के नीचे फिसला

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold, Silver Prices: सोने-चांदी में गिरावट जारी, MCX गोल्ड ₹1.55 लाख के नीचे फिसला

मंगलवार को भारत में गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स (Gold and Silver Futures) में गिरावट देखने को मिली। MCX पर सोना लगभग ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी 1% से अधिक गिरी है। यह गिरावट प्रॉफिट-बुकिंग (Profit-booking) और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) के ब्याज दरों पर संकेतों के इंतज़ार के बीच आई है। साथ ही, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का डर भी सता रहा है।

सोने-चांदी में गिरावट की वजह?

मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को भारतीय सर्राफा बाज़ारों में सोने और चांदी के भावों में नरमी देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने का भाव लगभग ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक गिर गया। वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा में 1% से ज़्यादा की गिरावट आई और यह ₹2.35 लाख प्रति किलोग्राम के करीब कारोबार कर रही है। बाज़ार के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ समय से आई तेज़ी के बाद मुनाफावसूली (Profit Booking) के चलते यह गिरावट आई है।

ग्लोबल फैक्टर और महंगाई का डर

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका के सेंट्रल बैंक, फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता है। निवेशक इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा या उन्हें स्थिर रखेगा। आमतौर पर, बढ़ी हुई ब्याज दरें सोने जैसी कीमती धातुओं को, जो कोई नियमित ब्याज नहीं देतीं, बॉन्ड या फिक्स्ड-डिपाजिट जैसे निवेशों की तुलना में कम आकर्षक बना देती हैं।

इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि भी वैश्विक बाज़ार के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। तेल की ऊंची कीमतें दुनिया भर में महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकती हैं। जब महंगाई बढ़ने का डर बढ़ता है, तो सोने और अर्थव्यवस्था के बीच का संबंध जटिल हो जाता है। ऐसे में, सेंट्रल बैंकों को कीमतें काबू करने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखना पड़ सकता है, जो सोने पर दबाव डालता है।

घरेलू मांग का क्या होगा?

कीमती धातुओं के फ्यूचर्स में गिरावट के बावजूद, भारत में फिजिकल गोल्ड (Physical Gold) की मांग का भविष्य ग्लोबल बाज़ार की चाल से थोड़ा अलग रह सकता है। आने वाला त्योहारी और शादी-विवाह का सीजन भारतीय बाज़ार में सोने की खरीदारियों के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। भले ही ऊंची कीमतें कभी-कभी खरीदारों को हतोत्साहित कर सकती हैं, सोना भारतीय संस्कृति में उपहार और संपत्ति के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में, ग्राहक सोने की खरीदारी पूरी तरह बंद करने के बजाय, कम मात्रा में या हल्के गहने खरीद सकते हैं।

आगे क्या?

भारतीय निवेशकों और खरीदारों के लिए, आने वाले समय में कीमतों की दिशा तीन मुख्य बातों पर निर्भर करेगी: पहला, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों से जुड़े संकेत जो ग्लोबल बुलियन कीमतों को तय करेंगे; दूसरा, भारतीय रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले प्रदर्शन, क्योंकि कमजोर रुपया आयातित सोने को और महंगा बना देता है; और तीसरा, त्योहारी सीजन के दौरान घरेलू मांग की स्थिति। इन ग्लोबल आर्थिक संकेतों के साथ-साथ स्थानीय मांग के पैटर्न पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.