मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना और चांदी के फ्यूचर्स में गिरावट देखने को मिली। हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों में नरमी आई। यह गिरावट अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की बायबैक खबर से ग्लोबल मेटल कीमतों में आई उछाल के बाद हुई है। अब ट्रेडर्स की निगाहें अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की टिप्पणियों पर टिकी हैं।
कीमतों में नरमी की वजह?
मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना और चांदी के फ्यूचर्स में गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ सत्रों में कीमती धातुओं में आई तेज उछाल के बाद निवेशकों ने अपने लाभ को सुरक्षित करने का फैसला किया। MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट में ₹214 की गिरावट आई और यह ₹1,63,172 प्रति 10 ग्राम के करीब कारोबार कर रहा था। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली सिल्वर फ्यूचर्स में ₹1,921 की बड़ी गिरावट देखी गई, जो लगभग ₹2,42,600 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
क्यों आई कीमतों में गिरावट?
कीमतों में यह गिरावट काफी हद तक अपेक्षित थी, क्योंकि इससे पहले की लंबी तेजी ने कीमती धातुओं को तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया था। इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की बायबैक की अप्रत्याशित घोषणा थी, जिसने मुद्रा की स्थिरता और राष्ट्रीय ऋण के स्तर को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। कीमतें इन ऊंचे स्तरों पर पहुंचने के बाद, कई ट्रेडर्स ने नई पोजीशन बनाने के बजाय मौजूदा सत्र में मुनाफा बुक करना बेहतर समझा।
ग्लोबल ट्रेंड्स और मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी यही रुख देखने को मिला। Comex प्लेटफॉर्म पर सोना लगभग $4,680 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी $67.80 प्रति औंस के आसपास थी। मुनाफावसूली के अलावा, बाजार कई वैश्विक घटनाओं के कारण अस्थिरता के लिए तैयार है। निवेशक आगामी अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, विशेष रूप से पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, साथ ही फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में दिए जाने वाले भाषण पर भी नजर रखे हुए हैं।
जोखिम और भविष्य का अनुमान
कीमती धातुओं के लिए माहौल मैक्रोइकोनॉमिक बदलावों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। बॉन्ड यील्ड में वृद्धि अक्सर सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों पर दबाव डालती है, क्योंकि यह धातु को रखने की अवसर लागत को बढ़ा देती है। इसके अलावा, ईरान पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों सहित भू-राजनीतिक तनाव भी ट्रेडर्स को सतर्क रख रहे हैं। भारत में, बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर होने वाली हाई-स्टेक मासिक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) एक्सपायरी से भी जूझ रहा है, जो अक्सर अल्पावधि की अस्थिरता को बढ़ाता है। इन संपत्तियों पर नजर रखने वालों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण अपडेट आगामी अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और ब्याज दरों के बारे में फेडरल रिजर्व के संकेत होंगे, क्योंकि ये सीधे कमोडिटी की कीमतों की दिशा को प्रभावित करेंगे।
