US फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने के संकेतों से बुलियन मार्केट में खलबली मच गई है। 31 अगस्त, 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि निवेशकों का रुझान कम ब्याज देने वाले एसेट्स से हट गया है।
ग्लोबल मार्केट और भारतीय सर्राफा बाजार में आज सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली है। इस बिकवाली की मुख्य वजह US फेडरल रिजर्व का सख्त रुख है। जैक्सन होल इकोनॉमिक संगोष्ठी में फेडरल रिजर्व के चेयर केविन वॉर्श ने साफ संकेत दिए हैं कि महंगाई को 2% के टारगेट पर लाने के लिए भविष्य में और ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।
बाजार का हाल (Market Impact)
भारतीय कमोडिटी बाजार में इस तेजी का असर साफ दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट 1.41% गिरकर ₹1,55,999 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 1.66% फिसलकर ₹2,36,651 प्रति किलोग्राम पर आ गई। ग्लोबल मार्केट में COMEX पर सोना 1.23% गिरकर $4,474.30 प्रति औंस और चांदी 1.71% लुढ़ककर $65.85 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है।
निवेश का गणित क्यों बदला?
गोल्ड और सिल्वर में यह बिकवाली इसलिए हो रही है क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने पर बॉन्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे एसेट्स अधिक आकर्षक हो जाते हैं। चूंकि सोने से कोई निश्चित ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए निवेशक अपना पैसा निकालकर ब्याज देने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लगा रहे हैं। वर्तमान में सितंबर में रेट हाइक की संभावना लगभग 57% आंकी गई है।
आगे क्या उम्मीद करें?
फिलहाल बुलियन बाजार दो मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। पहला, मजबूत डॉलर का असर गोल्ड पर पड़ रहा है और दूसरा, 'हायर-फॉर-लॉन्गर' इंटरेस्ट रेट का डर। साथ ही, मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ा रहा है। आने वाले हफ्तों में अमेरिका के महंगाई के आंकड़े और फेड के अधिकारियों के बयान ही बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
