चांदी की कीमतों में तेज गिरावट, आर्थिक चिंताएं हावी
शुक्रवार को सिल्वर फ्यूचर्स में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। Comex और MCX जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इसकी कीमत 4% से ज्यादा गिर गई। Comex पर चांदी का भाव $81.815 प्रति औंस रहा, जो 4.12% की गिरावट दर्शाता है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बढ़ने के बावजूद कीमतों में यह गिरावट कई बड़े आर्थिक कारणों से आई है। चांदी की कीमतों में इतनी तेज गिरावट की वजह इसकी अधिक अस्थिरता (volatility) है, क्योंकि इसका इस्तेमाल एक फाइनेंशियल एसेट के साथ-साथ औद्योगिक सामग्री के तौर पर भी होता है। इलेक्ट्रॉनिक और सोलर पैनल में इसके इस्तेमाल के कारण, यह आर्थिक चक्रों के प्रति ज्यादा संवेदनशील है। हाल के अमेरिकी-चीन टैरिफ डील से थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन अब चिंताएं आर्थिक डेटा को लेकर हैं, जो सेंट्रल बैंक्स को ब्याज दरें ऊंची रखने पर मजबूर कर सकती हैं। यह सोने-चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों के लिए अच्छी खबर नहीं है। हालांकि, साल-दर-साल के हिसाब से चांदी 152.26% उछली है, लेकिन वर्तमान गिरावट आर्थिक दबावों के चलते एक कंसॉलिडेशन फेज का संकेत देती है।
सोने की चाल भी धीमी, महंगाई और रेट हाइक का डर
इसी तरह, सोने की कीमतों में भी नरमी आई और यह करीब 1.5% गिर गया। Comex पर सोना $4,617.30 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जो 1.45% की कमी है। साल-दर-साल सोने में 43.99% का इजाफा हुआ है, लेकिन हालिया गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) का मजबूत होना है, जो 99.0452 के स्तर पर पहुंच गया। DXY की मजबूती लगातार बनी हुई महंगाई और फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों से प्रेरित है, जो सोने को कम आकर्षक बनाती है। एनालिस्ट्स का मानना है कि सोने में यह कमजोरी एक कंसॉलिडेशन फेज का हिस्सा है, जहां निवेशक महंगाई और मॉनेटरी पॉलिसी पर स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि सोना हमेशा से एक सेफ-हेवन एसेट रहा है, लेकिन फिलहाल इसकी दिशा ऊंची ब्याज दरों और मजबूत डॉलर की संभावनाओं से ज्यादा जुड़ी हुई है।
भू-राजनीतिक जोखिमों पर भारी पड़ीं आर्थिक चिंताएं
बाजार के जानकारों का कहना है कि आज के रुझान भू-राजनीतिक संकटों और कीमती धातुओं की कीमतों में वृद्धि के बीच पारंपरिक संबंध को चुनौती दे रहे हैं। मध्य पूर्व में संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने शुरुआत में सेफ-हेवन डिमांड को बढ़ावा दिया था, लेकिन अब यह व्यापक आर्थिक चिंताओं के आगे दब गया है। मजबूत अमेरिकी डॉलर एक प्रमुख कारण है कि सेफ-हेवन डिमांड को नजरअंदाज किया जा रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो डॉलर-निर्मित संपत्तियां अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं।
महंगाई और रेट हाइक की आशंका बढ़ा रही मुश्किलें
ग्लोबल कोर इन्फ्लेशन लगभग 3% पर बना हुआ है और इसके ऊंचा रहने की उम्मीद है। इससे यह उम्मीदें बढ़ रही हैं कि सेंट्रल बैंक्स ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकती हैं, या उन्हें बढ़ा भी सकती हैं। ऐसी स्थिति आमतौर पर सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव डालती है।
नज़दीकी भविष्य में चुनौतियां, लंबी अवधि में मजबूती की उम्मीद
आने वाले समय में कीमती धातुओं के लिए नज़दीकी दृष्टिकोण सावधानी भरा है, क्योंकि कई आर्थिक चुनौतियां सामने हैं। भू-राजनीतिक संघर्षों से ऊर्जा की कीमतों में झटके लगने और लगातार बनी हुई महंगाई के कारण सेंट्रल बैंक्स 2026 में ब्याज दर में कटौती में देरी कर सकती हैं या उन्हें टाल सकती हैं। बाजार दिसंबर तक संभावित बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं। यह आक्रामक मॉनेटरी पॉलिसी, मजबूत डॉलर के साथ मिलकर, सोने और चांदी के लिए एक कठिन माहौल बना रही है, जो कोई यील्ड (yield) नहीं देते। सिल्वर की बात करें तो, ऊंची कीमतें औद्योगिक उपयोगों में मांग को कम कर सकती हैं, खासकर अगर आर्थिक विकास धीमा होता है। UBS (यूबीएस) के एनालिस्ट्स ने पहले ही ऊंची कीमतों पर मांग संबंधी चिंताओं को देखते हुए अपने सिल्वर प्राइस टारगेट को नीचे कर दिया है। गोल्ड और सिल्वर दोनों में साल-दर-साल हुए बड़े फायदे से प्रॉफिट-टेकिंग का जोखिम भी बढ़ जाता है, खासकर लंबी तेजी के बाद। इसके अलावा, नई ट्रेड टेंशन या बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्ष और अधिक अस्थिरता ला सकते हैं। हालांकि, बाजार फिलहाल मॉनेटरी पॉलिसी संकेतों पर ज्यादा केंद्रित है।
लंबी अवधि का आउटलुक अभी भी मजबूत
इन मौजूदा गिरावटों के बावजूद, कीमती धातुओं के लिए लंबी अवधि का दृष्टिकोण मजबूत फंडामेंटल पर टिका हुआ है। सिल्वर की सप्लाई में महत्वपूर्ण कमी और क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स से मजबूत मांग इसके अंतर्निहित बाजार को सहारा दे रही है। J.P. Morgan (जेपी मॉर्गन) 2026 के अंत तक सोने की कीमतें $5,000/oz तक पहुंचने की उम्मीद करता है। वर्ल्ड बैंक (World Bank) इस साल के लिए कीमती धातुओं के मूल्य सूचकांक में 42% की वृद्धि का अनुमान लगाता है। यह औसत वार्षिक कीमतों पर एक सामान्य तेजी का दृष्टिकोण दर्शाता है, भले ही अल्पकालिक अस्थिरता हो। हालांकि, आगे का रास्ता इस बात पर निर्भर करेगा कि महंगाई, सेंट्रल बैंक की नीतियां और अमेरिकी डॉलर कैसे चलते हैं। निवेशक आगे की दिशा के लिए आगामी आर्थिक डेटा और भू-राजनीतिक विकास पर कड़ी नजर रखेंगे।