सोने-चांदी के बाजार में भारी भूचाल!
जनवरी 2026 के आखिर में, जो सोने और चांदी की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर थीं, उनमें एक ऐसा ऐतिहासिक उलटफेर हुआ जिसने सबको चौंका दिया। इस अचानक आई गिरावट ने बाजार से खरबों डॉलर का मूल्य साफ कर दिया। 30 जनवरी को गोल्ड की कीमत 12% तक गिरकर $4,900 प्रति औंस के नीचे चली गई, जबकि सिल्वर में तो और भी बुरा हाल हुआ, यह 36% से ज्यादा टूटकर $85 प्रति औंस के स्तर को भी पार कर गई। 1-2 फरवरी 2026 तक, स्पॉट गोल्ड $4,668 - $4,895 डॉलर प्रति औंस के आसपास था, और सिल्वर $74 - $85 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर रहा था। यह बड़ी गिरावट तब आई जब इससे पहले गोल्ड $5,600 डॉलर और सिल्वर $120 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को छू चुके थे।
गिरावट की मुख्य वजहें: ओवरबॉट और फेडरल रिजर्व का डर
इस अचानक और तेज गिरावट के पीछे कई कारण थे। एनालिस्ट्स का मानना है कि बाजार में अत्यधिक खरीदारी (Overbought Conditions), जिसे RSI रीडिंग से भी समझा जा सकता था, एक बड़े करेक्शन का संकेत दे रही थी। इसके अलावा, बड़े ट्रेडर्स द्वारा आक्रामक तरीके से की गई प्रॉफिट-टेकिंग (Profit-Taking) और CME Group द्वारा कुछ ही दिनों में बढ़ाए गए मार्जिन हाइक्स (Margin Hikes) ने स्थिति को और खराब कर दिया।
लेकिन सबसे बड़ा ट्रिगर बना राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा केविन वॉर्श (Kevin Warsh) को फेडरल रिजर्व का अगला चेयरमैन नॉमिनेट करना। वॉर्श के क्वांटिटेटिव ईजिंग (Quantitative Easing) और बैलेंस शीट डिसिप्लिन पर सख्त रुख के संकेत से यह आशंका बढ़ी कि अमेरिकी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) सख्त हो सकती है। इससे यूएस डॉलर मजबूत हुआ और सोने-चांदी जैसी संपत्तियों पर तुरंत दबाव आ गया। इस घटना ने बिकवाली की एक चेन रिएक्शन शुरू कर दी, जिसे कई लोग पैराबोलिक प्राइस मूवमेंट्स (Parabolic Price Movements) के बाद एक जरूरी 'मेल्ट-अप' करेक्शन मान रहे हैं।
एनालिस्ट्स की नजर: छोटी अवधि का झटका या लंबे समय का ट्रेंड?
हालांकि हालिया उथल-पुथल बहुत ज्यादा रही है, लेकिन कई बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी के लिए फंडामेंटल अभी भी मजबूत हैं। एनरिच मनी (Enrich Money) के CEO, पोनमुडी आर. (Ponmudi R.) का कहना है कि यह ट्रेंड का बदलना नहीं, बल्कि एक हेल्दी 'कूलिंग फेज' या टेक्निकल पुलबैक (Technical Pullback) है। उनका मानना है कि ऐसे डिप्स खरीदारी के मौके दे सकते हैं।
लंबे समय के लिए इन धातुओं के पक्ष में कई स्ट्रक्चरल ड्राइवर मौजूद हैं। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (Central Banks) अपने रिजर्व को डायवर्सिफाई करने के लिए लगातार सोना खरीद रहे हैं, जो गोल्ड की मांग का एक मजबूत आधार है। वहीं, सिल्वर की मांग ग्रीन एनर्जी (जैसे सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल), AI इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों से बढ़ रही है, जिससे सप्लाई डेफिसिट (Supply Deficit) गहरा रहा है। हालिया गिरावट के बावजूद, इन फंडामेंटल और डिमांड ट्रेंड्स से भविष्य में कीमतों में तेजी की उम्मीद है।
हाल ही में प्रेशियस मेटल्स माइनिंग स्टॉक्स (Precious Metals Mining Stocks) पर भी असर पड़ा है, जिसमें VanEck Gold Miners ETF (GDX) और GDXJ जैसे ETFs में तेज गिरावट देखी गई। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह क्वालिटी, लो-डेट प्रोड्यूसर्स (Low-Debt Producers) से अच्छी कीमत पर खरीदारी का मौका है, जिनकी लंबी अवधि की संभावनाएं मजबूत धातु कीमतों और स्ट्रक्चरल डेफिसिट के कारण अच्छी हैं।
आगे क्या? उम्मीदों के बीच सतर्कता
साल 2026 के आगे के लिए, अनुमान है कि अल्पावधि में अस्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन कई एक्सपर्ट्स सोने और चांदी के लिए लंबी अवधि के बुलिश आउटलुक (Bullish Outlook) पर कायम हैं। जे.पी. मॉर्गन (J.P. Morgan) का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही तक गोल्ड $5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है, और लंबी अवधि में $6,000 डॉलर प्रति औंस तक भी जा सकता है। सिटीग्रुप (Citigroup) ने तो अगले तीन महीनों में सिल्वर के $150 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगाया है, जिसका मुख्य कारण लगातार हो रही चीनी खरीदारी और डॉलर का कमजोर होना बताया जा रहा है। HDFC सिक्योरिटीज (HDFC Securities) भी 2026 में असाधारण रिटर्न (Extraordinary Returns) की उम्मीद कर रही है, बशर्ते घरेलू आयात शुल्क (Domestic Import Duties) बाधा न बनें।
कुल मिलाकर, कई एनालिस्ट्स का मानना है कि हालिया तेज करेक्शन ने बाजार को रीसेट कर दिया है, जिससे सट्टेबाजी कम हुई है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, करेंसी डायनामिक्स और महत्वपूर्ण औद्योगिक मांग रुझानों से प्रेरित होकर प्रेशियस मेटल्स में एक मजबूत रिकवरी की संभावना बनी हुई है।