बाजार में सोना और चांदी की कीमतें अपने हालिया ऊंचे स्तरों के करीब बनी हुई हैं। जून के सोने का वायदा (futures) करीब $4,705 प्रति औंस और मई के चांदी का वायदा करीब $75.30 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यह नाजुक संतुलन दो विपरीत शक्तियों के बीच फंसा है। पश्चिमी एशिया में गहराता भू-राजनीतिक तनाव, खासकर समुद्री व्यापार मार्गों के आसपास, कीमती धातुओं की सुरक्षित निवेश (safe-haven) के तौर पर मांग बढ़ा रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (Brent क्रूड करीब $109 प्रति बैरल और WTI करीब $97 प्रति बैरल) भी महंगाई बढ़ने की उम्मीदों को हवा दे रही हैं।
हालांकि, दूसरी ओर, ऊंची इंटरेस्ट रेट्स की संभावना, हॉकिश कमेंट्री (hawkish commentary) और मजबूत आर्थिक आंकड़े सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों (non-yielding assets) को कम आकर्षक बना रहे हैं। इस हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve), बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan), यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) से ब्याज दरों में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन महंगाई और मौजूदा सख्त नीतियों की अवधि पर चर्चा महत्वपूर्ण है।
4.8% तक पहुंचे 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) और 105.50 के करीब पहुंचता मजबूत यू.एस. डॉलर इंडेक्स (U.S. Dollar Index - DXY) सोने में निवेश को हतोत्साहित कर रहा है। अप्रैल में एस एंड पी 500 (S&P 500) में 0.5% की मामूली गिरावट देखी गई, जबकि VIX वोलेटिलिटी इंडेक्स (VIX volatility index) बढ़ा हुआ है, लेकिन घबराहट के स्तर से नीचे है।
डॉलर की मजबूती और अन्य कमोडिटीज (commodities) का प्रदर्शन भी कीमती धातुओं की बढ़त को सीमित कर रहा है। हालांकि, डॉलर के मुकाबले इंडियन रुपये (Indian Rupee) की कमजोरी (करीब 94.10) घरेलू स्तर पर सोने की कीमतों का समर्थन कर रही है, लेकिन वैश्विक रुझान अधिक जटिल है। कॉपर (Copper) की कीमतों में भी अप्रैल में 2% की गिरावट आई है, जो वैश्विक विनिर्माण उत्पादन और मांग संबंधी चिंताओं को दर्शाती है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर वैश्विक विकास को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं, तो डॉलर और मजबूत हो सकता है, जिससे सोना और चांदी पर दबाव बढ़ेगा। इसी तरह, पश्चिमी एशिया में हुए पिछले भू-राजनीतिक तनावों में शुरुआती उछाल के बाद कीमतें स्थिर हो गई थीं, क्योंकि आर्थिक कारक फिर से अधिक महत्वपूर्ण हो गए थे।
आगे चलकर, विश्लेषकों को उम्मीद है कि सोना और चांदी एक दायरे में ट्रेड करेंगे, लेकिन अल्पकालिक में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी। यह मुख्य रूप से सेंट्रल बैंक्स की भविष्य की मौद्रिक नीतियों पर दी जाने वाली सटीक प्रतिक्रियाओं और पश्चिमी एशिया में किसी भी बड़े घटनाक्रम पर निर्भर करेगा। कुछ विश्लेषक सोने को लेकर तटस्थ से थोड़ा सकारात्मक रुख रखते हैं, जबकि अन्य औद्योगिक मांग बढ़ने पर चांदी के लिए अधिक तेजी की उम्मीद कर रहे हैं। भू-राजनीतिक जोखिमों और सख्त मौद्रिक नीति के लगातार खतरे के बीच, सोना और चांदी को निवेशकों के लिए अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
