आज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। डॉलर के कमजोर होने और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में गिरावट के चलते यह उछाल आया। इस दौरान एक्सचेंज (MCX) के शेयरों में भी 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
क्यों चढ़े सोना-चांदी?
MCX पर आज बहुमूल्य धातुओं (Precious Metals) में शानदार तेजी रही। अक्टूबर डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,58,260 से ₹1,58,540 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करते दिखे, वहीं सितंबर डिलीवरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स ₹2,39,000 प्रति किलोग्राम के पार निकल गए।
इस तेजी की मुख्य वजहें अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान हैं, जिनमें अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स का गिरना शामिल है। हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी ने बॉन्ड-बायबैक प्रोग्राम को बढ़ाया है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और बॉन्ड यील्ड्स गिरेंगी। ऐसे में, सोना-चांदी जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियां निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाती हैं।
एक्सचेंज के शेयर भी चढ़े
कमोडिटी ट्रेडिंग में आई इस तेजी का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) के शेयरों में ट्रेडिंग सेशन के दौरान 5% का इजाफा हुआ। एक्सचेंज के लिए, कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव और ट्रेडिंग वॉल्यूम का बढ़ना सीधे तौर पर ट्रांजेक्शन से होने वाली आय (Transaction-based Revenue) को बढ़ाता है, इसीलिए बुलियन (Bullion) में दिलचस्पी बढ़ने से इसके शेयर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं।
आगे क्या? महंगाई और ब्याज दरें बन सकती हैं रोड़ा
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह तेजी कुछ चिंताओं के बीच आई है। दुनिया भर में महंगाई (Inflation) एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जो केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने का दबाव डाल रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) भी सतर्क रुख अपनाए हुए है और महंगाई को 2% के लक्ष्य के करीब लाए बिना ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की बात कह सकता है।
इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) जैसे कारक भी वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी एक बाधा बन सकती हैं, क्योंकि ये महंगाई को और बढ़ा सकती हैं, जिससे सोना-चांदी जैसी धातुओं की ऊपरी चाल सीमित हो सकती है।
निवेशकों को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले संकेतों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। ब्याज दरों या महंगाई के आंकड़ों पर कोई भी बदलाव सीधे बॉन्ड यील्ड्स और नतीजतन सोना-चांदी की कीमतों को प्रभावित करेगा। साथ ही, भू-राजनीतिक स्थिरता में किसी भी बदलाव पर भी नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि ये घटनाएं अक्सर सुरक्षित-संपत्ति (Safe-haven assets) के प्रति बाजार की भावना को अचानक बदल देती हैं।
