Gold, Silver Futures Drop: महंगाई और ब्याज दरें बढ़ने का डर, कीमती धातुओं में बिकवाली

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold, Silver Futures Drop: महंगाई और ब्याज दरें बढ़ने का डर, कीमती धातुओं में बिकवाली

पिछले हफ्ते भारतीय कमोडिटी मार्केट में सोने और चांदी के फ्यूचर्स में बड़ी गिरावट देखी गई। सोने का भाव करीब **2%** गिरकर **₹1.4 लाख** प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी **2.8%** लुढ़ककर **₹2.16 लाख** प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ब्याज दरें ऊंची बने रहने की उम्मीदों ने कीमती धातुओं की डिमांड को कम कर दिया है।

क्यों गिरी सोने-चांदी की चाल?

पिछले हफ्ते भारतीय कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं (Precious Metals) पर बिकवाली का दबाव देखा गया। वैश्विक मैक्रो इकोनॉमिक दबावों के बीच Multi Commodity Exchange (MCX) पर अगस्त गोल्ड फ्यूचर्स करीब 2% की गिरावट के साथ लगभग ₹1.4 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। वहीं, सितंबर डिलिवरी वाली सिल्वर फ्यूचर्स में 2.8% की बड़ी गिरावट आई और यह ₹2.16 लाख प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

कच्चे तेल का असर और ब्याज दरों का डर

सोने और चांदी की कीमतों में आई कमजोरी की मुख्य वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई तेजी है। बढ़ती ऊर्जा कीमतें महंगाई (Inflation) को बढ़ावा देती हैं, जिससे सेंट्रल बैंकों के लिए मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर मुश्किलें बढ़ जाती हैं। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ब्याज दरों को उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंचा रख सकता है। ऊंची ब्याज दरें गोल्ड जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स को कम आकर्षक बनाती हैं, क्योंकि ये सरकारी बॉन्ड जैसी इंटरेस्ट-बेयरिंग इनवेस्टमेंट्स को ज्यादा फायदेमंद बना देती हैं।

डॉलर की मजबूती और निवेशकों का रुख

कीमतों पर दबाव की एक और वजह अमेरिकी डॉलर (US Dollar) की मजबूती है। चूंकि गोल्ड और सिल्वर का वैश्विक कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए मजबूत डॉलर अन्य करेंसी का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए इन धातुओं को महंगा बना देता है, जिससे मांग अक्सर कम हो जाती है।

ऐतिहासिक रूप से गोल्ड को भू-राजनीतिक तनाव के समय एक सुरक्षित निवेश (Safe-Haven Asset) माना जाता है। लेकिन हालिया बाजार के रुझान बताते हैं कि मैक्रो इकोनॉमिक चिंताएं और प्रॉफिट-बुकिंग (Profit-Booking) फिलहाल पारंपरिक वजहों पर हावी हो रही हैं।

निवेशकों के लिए, यह मूल्य चाल बाजार की मनोविज्ञान में बदलाव को दर्शाती है। वैश्विक अनिश्चितता के खिलाफ बचाव के तौर पर गोल्ड जमा करने के बजाय, कई बाजार भागीदारों ने पिछली तेजी के बाद मुनाफा बुक करने का विकल्प चुना है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स (US Treasury Yields) में बढ़ोतरी ने कैपिटल के लिए प्रतिस्पर्धा पैदा की है, जिससे बुलियन से ध्यान हट रहा है। भारतीय रुपये के प्रदर्शन से भी घरेलू बाजार को ज्यादा राहत नहीं मिली है, क्योंकि मुद्रा में उतार-चढ़ाव वैश्विक कमोडिटी रुझानों के नकारात्मक प्रभाव की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं रहा है।

आगे चलकर, बाजार प्रतिभागी आगामी महंगाई डेटा और सेंट्रल बैंक की नीतिगत घोषणाओं पर नजर रखेंगे, क्योंकि ये तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि मौजूदा बिकवाली का दबाव बना रहता है या आने वाले हफ्तों में सपोर्ट लेवल बना रहता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.