ग्लोबल फैक्टर हावी, डोमेस्टिक अनिश्चितता का असर
घरेलू शेयर बाजार में आ रहे नतीजों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच, कीमती धातुओं की चाल पर ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक ट्रेंड्स का ज्यादा असर दिख रहा है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और एनर्जी मार्केट्स में हो रहे बदलावों ने सोने की पारंपरिक 'सेफ हेवन' (Safe Haven) और 'इन्फ्लेशन हेज' (Inflation Hedge) की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोहरी मार झेल रहे सोने-चांदी
बाजार में इस समय कीमती धातुओं पर कई तरह के दबाव देखने को मिल रहे हैं। भारत में चुनावी नतीजों को लेकर निवेशकों की हिचकिचाहट एक तात्कालिक वजह लग रही है, जो ऐतिहासिक रूप से वोलैटिलिटी (Volatility) लाती है। हालांकि, सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी डॉलर (US Dollar) की लगातार मजबूती से आ रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटीज (Commodities) जैसे सोने-चांदी विदेशी करेंसी धारकों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे डिमांड घटती है। यह करेंसी की मजबूती, जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) के बीच सेफ हेवन के तौर पर सोने की मांग को कम कर रही है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं, पर कुछ संकेत बताते हैं कि महंगाई को लेकर चरम डर थोड़ा कम हो सकता है, जो सोने की इन्फ्लेशन हेज के तौर पर अपील को भी घटा सकता है।
पुराने पैटर्न से अलग चाल
आमतौर पर, भारत में बड़ी राजनीतिक अनिश्चितताओं के समय सोने में सेफ-हेवन के तौर पर तेजी देखी जाती रही है। लेकिन, इस बार ग्लोबल मैक्रो ट्रेंड्स घरेलू कारणों पर भारी पड़ रहे हैं। डॉलर का मजबूत होना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से डॉलर के मजबूत होने पर सोने की कीमतें गिरती हैं। एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि यह ट्रेंड जारी रह सकता है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बनी रहती है, तभी सोना $2400-$2500 के स्तर तक जा सकता है। वहीं, चांदी में ज्यादा वोलैटिलिटी दिख रही है, जो स्पेकुलेटिव इंटरेस्ट (Speculative Interest) और इंडस्ट्रियल डिमांड (Industrial Demand) दोनों से प्रभावित है। अगर सोना ऊपर जाता है, तो चांदी $30-$32 तक जा सकती है। अभी, MCX गोल्ड फ्यूचर्स (MCX Gold Futures) करीब ₹800 घटकर लगभग ₹72,000 प्रति 10 ग्राम पर और MCX सिल्वर फ्यूचर्स (MCX Silver Futures) करीब ₹1,500 घटकर ₹85,000 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे हैं।
डॉलर की मजबूती और घटती महंगाई का असर
डॉलर की मजबूती सोने पर नीचे की ओर दबाव बनाने वाला एक बड़ा बियरिश (Bearish) तर्क है। अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) टाइट मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) का संकेत देता है, या महंगाई के आंकड़े उम्मीद से जल्दी कम होते हैं, तो इन्फ्लेशन हेज के तौर पर सोने की मांग काफी कम हो जाएगी। इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल टेंशन में कोई भी नरमी, खासकर एनर्जी (Energy) उत्पादक क्षेत्रों में, सोने जैसी सेफ-हेवन एसेट्स (Safe Haven Assets) के लिए सपोर्ट खत्म कर सकती है। कच्चे तेल की कीमतों का $100 बैरल से नीचे गिरना यह संकेत दे सकता है कि महंगाई का चरम डर कम हो रहा है, जिससे सोना कम आकर्षक हो जाएगा। जियोपॉलिटिकल रिस्क पर सोने की निर्भरता, इसे ग्लोबल स्थिरता में बदलाव के प्रति संवेदनशील बनाती है। सोने पर कोई यील्ड (Yield) नहीं मिलता, जो इसे बढ़ती ब्याज दरों वाले माहौल में कम आकर्षक बनाता है। निवेशक भारत के चुनावों की तात्कालिक अनिश्चितता के साथ-साथ ग्लोबल मैक्रो प्रेशर से जूझ रहे हैं।
मार्केट आउटलुक और अहम स्तर
मार्केट पार्टिसिपेंट्स (Market Participants) किसी भी संभावित पॉलिसी शिफ्ट के लिए भारतीय चुनाव नतीजों पर कड़ी नजर रख रहे हैं, लेकिन मुख्य फोकस अमेरिकी डॉलर की दिशा और महंगाई के आंकड़ों पर बना हुआ है। एनालिस्ट्स का कहना है कि जब तक कोई बड़ी जियोपॉलिटिकल घटना या लगातार बनी हुई महंगाई मॉनेटरी पॉलिसी पर बड़े पुनर्मूल्यांकन के लिए मजबूर नहीं करती, तब तक सोना शॉर्ट-टर्म में एक सीमित दायरे में ट्रेड कर सकता है या दबाव में रह सकता है। चांदी की चाल सोने के साथ-साथ इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग (Industrial Manufacturing) गतिविधि के संकेतों से भी प्रभावित होगी। सोने के अहम रेजिस्टेंस लेवल (Resistance Level), जिसे कुछ एनालिस्ट $2500 के आसपास बता रहे हैं, से ऊपर एक निर्णायक बढ़त सस्टेन्ड बुलिश रिवर्सल (Sustained Bullish Reversal) का संकेत देगी, जबकि $2300 के इमीडिएट सपोर्ट (Support) से नीचे गिरना और गिरावट का संकेत दे सकता है।
