डॉलर की मजबूती और फेड के डर से कीमती धातुओं में भारी गिरावट
शुक्रवार, 22 मई, 2026 को कीमती धातुओं में बिकवाली का जबरदस्त दबाव देखा गया। अमेरिकी डॉलर में आई तेज मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदें कीमतों में गिरावट के मुख्य कारण रहे। स्पॉट गोल्ड 0.2% गिरकर $4,535.63 प्रति औंस पर आ गया, जिससे इस हफ्ते इसकी गिरावट 2.5% से अधिक हो गई और यह लगातार दूसरे हफ्ते टूटा। हालांकि, घरेलू MCX गोल्ड की कीमतें थोड़ी बढ़कर ₹1,59,688 पर बंद हुईं।
सोने के साथ चांदी और प्लैटिनम भी गिरे
चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखी जा रही है, जो इस हफ्ते 8% से अधिक की साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रही है और $76.54 प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। प्लैटिनम में भी 0.2% की गिरावट आई और यह $1,967.30 प्रति औंस पर बंद हुआ। यह प्लैटिनम के लिए लगातार चौथे दिन की गिरावट है, जिससे इस हफ्ते की कुल गिरावट 4% से अधिक हो गई है।
डॉलर की बढ़त और फेड का धातुओं पर असर
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 99 के ऊपर मजबूती बनाए हुए है, जो इस हफ्ते लगभग 0.4% बढ़ा है। डॉलर की इस मजबूती से सोना और चांदी जैसी कमोडिटीज दूसरी मुद्राओं का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं, जिससे मांग कम हो जाती है। इस दबाव को फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदें और बढ़ा रही हैं। CME के FedWatch टूल के अनुसार, इस साल फेड द्वारा कम से कम एक 25-बेसिस-पॉइंट की दर वृद्धि की 58% संभावना है। उच्च ब्याज दरें बॉन्ड जैसी यील्ड (yield) देने वाली संपत्तियों को अधिक आकर्षक बनाती हैं, जो बदले में सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं की अपील को कम कर देती हैं, जिनसे कोई आय नहीं होती।
कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक कारक
सप्ताह के दौरान कमी की उम्मीदों के बावजूद, कच्चे तेल की कीमतें $105 के करीब कारोबार कर रही हैं। ईरान से संबंधित शांति वार्ता सहित भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, हालांकि कुछ सतर्क आशावाद है। हालांकि उच्च तेल की कीमतें कभी-कभी सुरक्षित-आश्रय संपत्ति (safe-haven asset) के रूप में सोने की भूमिका का समर्थन कर सकती हैं, लेकिन मौजूदा बाजार का ध्यान मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं और संभावित दर वृद्धि पर केंद्रित है, जिसने तेल की कीमतों के प्रभाव को कम कर दिया है।
कीमती धातुओं को रखने की लागत
वर्तमान बाजार स्थितियां कीमती धातुओं में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अवसर लागत (opportunity cost) को उजागर करती हैं। जैसे-जैसे ब्याज दरें बढ़ेंगी, फिक्स्ड-इनकम निवेश, सोने और चांदी जैसी बिना यील्ड वाली संपत्तियों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी रिटर्न प्रदान करेंगे। यह स्थिति विशेष रूप से इन धातुओं के लिए चुनौतीपूर्ण है, जिनकी कीमतें अक्सर वास्तविक ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती में बदलाव के प्रति संवेदनशील होती हैं। औद्योगिक धातुओं जैसी अन्य कमोडिटीज की मांग भी वैश्विक आर्थिक वृद्धि के पूर्वानुमानों के आधार पर बदल सकती है, जो मौद्रिक नीति में सख्ती से प्रभावित होते हैं।
सोने के लिए बाधाएं और मुद्रास्फीति बचाव (Inflation Hedge) पर चिंताएं
अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती कीमती धातुओं के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश करती है। यदि फेडरल रिजर्व अपनी आक्रामक नीति (hawkish stance) बनाए रखता है, तो डॉलर में और अधिक मजबूती से सोने और चांदी की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, जैसे-जैसे बढ़ती दरें बाजार का प्रमुख नैरेटिव बनती जा रही हैं, सोने की मुद्रास्फीति बचाव (inflation hedge) के रूप में पारंपरिक भूमिका का परीक्षण किया जा रहा है। निवेशक उन अन्य संपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं जो बेहतर मुद्रास्फीति सुरक्षा या बढ़ती ब्याज दरों के माहौल में उच्च रिटर्न प्रदान करती हैं। मुद्रास्फीति बचाव के रूप में अप्रभावी माने जाने पर गोल्ड-समर्थित ईटीएफ (ETFs) और भौतिक सोने की होल्डिंग्स से लगातार निकासी देखी जा सकती है।
