शुक्रवार को भारतीय गोल्ड और सिल्वर ETF में **2%** से **3%** तक की जबरदस्त तेजी देखने को मिली। यह तेजी वैश्विक बुलियन कीमतों में आई उछाल का सीधा असर है। दरअसल, अमेरिका से आए कमजोर लेबर डेटा के बाद निवेशकों को फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर नए संकेत मिले हैं।
क्या हुआ?
शुक्रवार को भारतीय एक्सचेंज-ट्रैडेड फंड्स (ETFs) जो गोल्ड (Gold) और सिल्वर (Silver) को ट्रैक करते हैं, उनमें अच्छी खासी बढ़त दर्ज की गई। कई फंड्स 2% से 3% तक चढ़े। यह ग्लोबल मार्केट में चल रहे ट्रेंड को दर्शाता है, जहां कीमती धातुओं की कीमतों में नई अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बाद बढ़ोतरी हुई है। खासतौर पर, अमेरिका के उम्मीद से कमजोर रहे लेबर मार्केट के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ाने की चिंताओं को कम कर दिया है। चूंकि सोना और चांदी ब्याज नहीं देते, इसलिए जब ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदें कम होती हैं, तो ये निवेशकों के लिए ज़्यादा आकर्षक हो जाते हैं।
गोल्ड और सिल्वर ETF का प्रदर्शन
गोल्ड सेगमेंट में, कई बड़े ETFs ने अच्छी बढ़त दिखाई। Nippon India ETF Gold BeES 2.4% बढ़कर ₹120.51 पर पहुंच गया, जबकि ICICI Prudential Gold ETF भी 2.4% की बढ़ोतरी के साथ ₹124.90 पर रहा। SBI Gold ETF और Tata Gold Exchange Traded Fund जैसे अन्य फंड्स में भी 2.3% की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, सिल्वर ETFs ने तो गोल्ड से भी बेहतर प्रदर्शन किया। Nippon India Silver BeES इस ग्रुप में सबसे आगे रहा, जो 2.6% बढ़कर ₹221.95 पर पहुंच गया। इसके बाद Tata Silver Exchange Traded Fund, SBI Silver ETF, और ICICI Prudential Silver ETF में 2.4% से 2.5% के बीच बढ़ोतरी हुई।
ग्लोबल कनेक्शन
घरेलू ETF की इन चालों का सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजारों से है। स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) की कीमतों में दिन के दौरान 1% का उछाल आया, जो जून के अंत के बाद के उच्चतम स्तर को छू गया। अगस्त डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स (US Gold Futures) में भी 1.3% की तेजी देखी गई। पूरे हफ्ते की बात करें तो, गोल्ड की कीमतों में लगभग 1.8% की बढ़ोतरी हुई है, जो पांच हफ्तों में पहली साप्ताहिक बढ़त है। सिल्वर ने भी वैश्विक स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया, स्पॉट सिल्वर की कीमतों में 2.1% की तेजी आई। प्लेटिनम (Platinum) और पैलेडियम (Palladium) जैसी अन्य कीमती धातुओं में भी इसी तरह का ऊपर की ओर रुझान देखा गया, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमोडिटीज सेक्टर के प्रति सामान्य सकारात्मक भावना को दर्शाता है।
फिजिकल डिमांड पर असर
जहां ETF निवेशकों ने कीमतों में आई इस तेजी पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, वहीं भारत में फिजिकल गोल्ड की मांग पर इसका असर थोड़ा अलग रहा। हफ्ते की शुरुआत में, मांग में मामूली सुधार देखा गया था; हालांकि, शुक्रवार को कीमतों में आई तेज उछाल के कारण कुछ फिजिकल खरीदारों ने अपनी खरीदारी रोक दी। यह भारतीय बाजार में एक आम बात है, जहां खरीदार अक्सर कीमतों में तेजी से उछाल के बाद 'रुको और देखो' की रणनीति अपनाते हैं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
इन फंड्स पर नज़र रखने वाले निवेशकों को अमेरिकी महंगाई (Inflation) और रोजगार (Employment) के आंकड़ों पर भविष्य के अपडेट पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये आंकड़े फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की नीतियों को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, चूंकि सोना और चांदी की कीमतों में हालिया वृद्धि के कारण भारत में फिजिकल डिमांड में नरमी आई है, इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह ट्रेंड जारी रहता है या त्योहारी सीजन से जुड़ी खरीदारी की रुचि मूल्य संवेदनशीलता पर हावी होने लगती है। अमेरिकी डॉलर (US Dollar) की चाल और वैश्विक ब्याज दरों की उम्मीदें आने वाले हफ्तों में बुलियन की कीमतों को चलाने वाले मुख्य कारक बने रहेंगे।
