US से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों ने बाजार का मिजाज बदल दिया है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों के चलते गोल्ड और सिल्वर ETFs में **2%** तक की गिरावट दर्ज की गई है।
सोमवार, 7 सितंबर 2026 को भारतीय निवेशकों के लिए गोल्ड और सिल्वर ETFs का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। इसकी मुख्य वजह अगस्त महीने के शानदार US जॉब डेटा रहे, जिसमें 1,62,000 नई नौकरियां जुड़ने की खबर सामने आई है। इस मजबूती के बाद अब मार्केट में 15-16 सितंबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 60% तक पहुंच गई है।
क्यों दबाव में है बुलियन?
ब्याज दरें बढ़ने पर अक्सर सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न आकर्षक हो जाता है। चूंकि सोने और चांदी में कोई फिक्स्ड इंटरेस्ट या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए निवेशक अपना पैसा बॉन्ड की ओर शिफ्ट कर रहे हैं। साथ ही, मजबूत US डॉलर ने भी कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बनाया है।
घरेलू ETFs का हाल
भारतीय बाजार में मौजूद गोल्ड और सिल्वर ETFs पर इसका सीधा असर दिखा:
- ICICI Prudential Gold ETF, SBI Gold ETF, और Nippon India ETF Gold BeES में लगभग 1.6% से 1.7% की गिरावट आई।
- वहीं, Nippon India Silver ETF और Tata Silver ETF जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में भी 1.5% से ज्यादा की बिकवाली देखी गई।
क्रूड ऑयल का असर
कीमती धातुओं के अलावा कमोडिटी मार्केट तनावपूर्ण है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $97 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई के लिए बड़ा खतरा हैं, जो आने वाले समय में निवेशकों के लिए मार्केट को और भी जटिल बना सकती हैं। अब सभी की नजरें आने वाले US इन्फ्लेशन डेटा पर टिकी हैं, जो फेडरल रिजर्व की अगली रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
