31 अगस्त 2026 को कीमती धातुओं और उनसे जुड़े ETFs में भारी बिकवाली देखी गई। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के ब्याज दरें बढ़ाने के संकेतों के बाद निवेशकों ने इन एसेट्स से दूरी बना ली है।
सोमवार, 31 अगस्त 2026 को कीमती धातुओं और उनसे जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में भारी दबाव देखने को मिला। बाजार की यह हलचल अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख के बाद शुरू हुई। जैक्सन होल संगोष्ठी (Jackson Hole symposium) में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने साफ कर दिया कि महंगाई पर लगाम लगाना अभी भी उनकी प्राथमिकता है।
महंगाई और दरों का गणित
वॉर्श ने स्पष्ट किया कि महंगाई को 2% के लक्ष्य तक लाने के लिए अभी काफी काम बाकी है। उन्होंने संकेत दिए कि अगर कीमतों का दबाव कम नहीं होता है, तो ब्याज दरों को और ऊंचा रखा जा सकता है या फिर उनमें और बढ़ोतरी की जा सकती है। इस कमेंट्री के बाद बाजार में सितंबर 2026 में रेट हाइक की संभावना काफी बढ़ गई है।
गोल्ड और सिल्वर पर क्यों पड़ा असर?
गोल्ड और सिल्वर जैसे एसेट्स पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इन नॉन-यील्डिंग एसेट्स (non-yielding assets) को रखने की लागत (opportunity cost) बढ़ जाती है। इसी कारण निवेशक इन्हें बेचकर ऐसी जगहों पर पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं जहाँ से फिक्स्ड ब्याज मिल सके।
ETFs का हाल
बिकवाली का असर सीधे ETFs पर दिखा। सिल्वर ETFs, जो आमतौर पर ज्यादा वोलटाइल होते हैं, में बड़ी गिरावट देखी गई। Nippon India Silver ETF और Aditya Birla Sun Life Silver ETF जैसे फंड्स ने सत्र के दौरान भारी नुकसान दर्ज किया। गोल्ड ETFs का भी यही हाल रहा।
फिलहाल, निवेशक अब नए महंगाई डेटा और फेडरल रिजर्व के अगले फैसलों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। बाजार में अभी कमोडिटी को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
