कीमती धातुओं में लौटी मजबूती
सोमवार, 30 मार्च 2026 को कीमती धातुओं में अच्छी मजबूती देखने को मिली। MCX गोल्ड ₹1,46,000 के पार कारोबार कर रहा था, वहीं MCX सिल्वर ₹2,26,000 के सपोर्ट लेवल के ऊपर बना रहा। स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,508.40 प्रति औंस के करीब पहुंच गई, जो पिछली क्लोजिंग से बढ़त दिखा रही थी। स्पॉट सिल्वर भी $71.33 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था। इस तेजी के साथ ही US Dollar Index (DXY) में थोड़ी नरमी आई और यह 100.0961 पर पहुंच गया, जो डॉलर-डेनॉमिनेटेड एसेट्स के लिए अक्सर सपोर्टिव होता है। हालांकि, मार्केट में सावधानी बनी हुई है, क्योंकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड के लिए तत्काल रेजिस्टेंस लेवल ₹1,49,000–₹1,50,000 और सिल्वर के लिए ₹2,32,000 पर है।
महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव से डिमांड बढ़ी
सोने और चांदी की मौजूदा मजबूती के पीछे कई जटिल आर्थिक कारण हैं। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के अनुसार, फरवरी 2026 में महंगाई साल-दर-साल 2.4% पर स्थिर रही, जबकि कोर इन्फ्लेशन 2.5% था। हालांकि, अनुमान है कि 2026 में कोर PCE इन्फ्लेशन 2.7% तक पहुंच सकता है। यह लगातार बढ़ती महंगाई, मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे संघर्षों से उपजे भू-राजनीतिक अस्थिरता के साथ मिलकर, कीमती धातुओं की डिमांड को बढ़ा रही है। इन्हें महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षा कवच (Hedge) और सेफ-हेवन एसेट के तौर पर देखा जा रहा है। ऐतिहासिक तौर पर, सोने ने महंगाई के दौर में शानदार तेजी दिखाई है, और चांदी में भी, जो अधिक वोलेटाइल (Volatile) है, अच्छा प्रदर्शन रहा है। साल-दर-साल के आंकड़े बताते हैं कि सोना लगभग 45.48% चढ़ा है, वहीं चांदी में 107% से अधिक की भारी उछाल आई है। एनालिस्ट्स अभी भी बुलिश (Bullish) बने हुए हैं और 2026 के अंत तक सोने के लिए $4,900 से $6,000 प्रति औंस और चांदी के लिए $85 से $110 प्रति औंस तक के टारगेट दे रहे हैं। सेंट्रल बैंकों की मजबूत खरीदारी और डॉलर-आधारित एसेट्स से डायवर्सिफिकेशन (Diversification) की लंबी अवधि की प्रवृत्ति भी इन अनुमानों को सपोर्ट कर रही है।
चुनौतियां और बाज़ार में सतर्कता
हालिया तेजी के बावजूद, कीमती धातुओं के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। मार्च 2026 में ब्याज दरों को 3.5%-3.75% पर स्थिर रखने के बाद, फेडरल रिजर्व ने आगे एक सतर्क रास्ता अपनाने का संकेत दिया है। अब 2026 में केवल एक रेट कट की उम्मीद जताई जा रही है। यह पहले की उम्मीदों के विपरीत है और लगातार बनी हुई महंगाई और एनर्जी की बढ़ती कीमतों की चिंताओं के कारण, सोने जैसी नॉन-इंटरेस्ट बेयरिंग एसेट्स का आकर्षण कम हो रहा है। भू-राजनीतिक तनाव, जो शुरू में सेफ-हेवन डिमांड को बढ़ा रहे थे, अब बढ़ी हुई वोलेटिलिटी (Volatility) भी ला रहे हैं। US Dollar Index, हालिया गिरावट के बावजूद, पिछले महीने में अपनी मजबूती दिखा चुका है और फिर से ऊपर जा सकता है, जिससे डॉलर-डेनॉमिनेटेड कमोडिटीज (Commodities) पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, दोनों कीमती धातुओं ने हाल ही में बड़ी गिरावट देखी है; पिछले महीने में गोल्ड अपने ऐतिहासिक हाई (जनवरी 2026 में $5,600 से ऊपर, चांदी $121 से ऊपर) से लगभग 14.71% नीचे गिरा, जबकि चांदी 21.07% फिसली। यह दर्शाता है कि बाज़ार रेट एक्सपेक्टेशन्स (Rate Expectations) और इकोनॉमिक डेटा (Economic Data) में बदलावों के प्रति बहुत संवेदनशील है, और प्रमुख सपोर्ट लेवल टूटते ही अचानक करेक्शन (Correction) की संभावना बनी रहती है।
आगे सोने और चांदी का क्या होगा?
मार्केट पार्टिसिपेंट्स (Market Participants) फिलहाल इंतजार कर रहे हैं, और अभी कोई स्पष्ट दिशा तय नहीं हुई है। जहां लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स (Long-term Investors) कीमतों में गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी करने में वैल्यू देख सकते हैं, वहीं शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स (Short-term Traders) ग्लोबल न्यूज़ और पॉलिसी संकेतों से प्रभावित बढ़ी हुई वोलेटिलिटी का सामना करेंगे। फेडरल रिजर्व के आने वाले पॉलिसी फैसले, महंगाई के आंकड़े और भू-राजनीतिक डेवलपमेंट सोने और चांदी के अल्पकालिक (Near-term) रुख को तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। यह सब तब हो रहा है जब मजबूत स्ट्रक्चरल डिमांड (Structural Demand) कई एनालिस्ट्स के बीच लॉन्ग-टर्म बुलिश आउटलुक (Bullish Outlook) को सपोर्ट कर रही है। तत्काल ध्यान प्रमुख टेक्निकल लेवल्स (Technical Levels) पर है, जहां क्रिटिकल सपोर्ट (Critical Support) से नीचे की गिरावट आगे और कमजोरी ला सकती है।