सोने की कीमतों में इस तिमाही में **2013** के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज होने की आशंका है। अमेरिका के फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा ब्याज़ दरें बढ़ाने की उम्मीदों ने सोने की चमक फीकी कर दी है। इस बिकवाली का असर चांदी, प्लेटिनम और पैलेडियम पर भी दिख रहा है।
क्या हुआ?
इस तिमाही में सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो पिछले 10 सालों का सबसे खराब प्रदर्शन है। मंगलवार को स्पॉट गोल्ड में 0.3% की मामूली तेज़ी के बावजूद, जून के दौरान इसमें 11.2% की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस बिकवाली की मुख्य वजह अमेरिका के फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा महंगाई पर काबू पाने के लिए लगातार ब्याज़ दरें बढ़ाने की उम्मीद है। मौजूदा समय में बाज़ार 67% तक यह मानकर चल रहा है कि फेडरल रिजर्व सितंबर में एक और ब्याज़ दर वृद्धि कर सकता है।
सोने का आकर्षण क्यों कम हो रहा है?
सोना एक ऐसा एसेट है जिस पर कोई ब्याज़ या डिविडेंड (Dividend) नहीं मिलता। जब फेडरल रिजर्व ब्याज़ दरें बढ़ाता है, तो बैंक जमा या बॉन्ड जैसे अन्य निवेश विकल्प निवेशकों के लिए ज़्यादा आकर्षक हो जाते हैं। ऐसे में, बिना किसी नियमित आय वाले सोने को रखने और उसका बीमा कराने का खर्च निवेशकों को भारी लगने लगता है। ब्याज़ दरें बढ़ने से सोने को रखने की लागत बढ़ जाती है, जिससे निवेशक ऐसे एसेट्स की ओर रुख करते हैं, जिन्हें ऊंची ब्याज़ दरों के माहौल का फायदा मिलता है।
कीमती धातुओं पर असर
यह गिरावट सिर्फ सोने तक ही सीमित नहीं है। चांदी, प्लेटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं पर भी दबाव दिख रहा है। मंगलवार को चांदी में 1.9% की तेज़ी आई, लेकिन यह 2020 की शुरुआत के बाद से अपनी सबसे खराब तिमाही प्रदर्शन की ओर बढ़ रही है। प्लेटिनम में 1.6% की गिरावट आई, जबकि पैलेडियम 0.6% लुढ़क गया। इससे पता चलता है कि बाज़ार की मौजूदा धारणा सिर्फ सोने को ही नहीं, बल्कि पूरी कीमती धातुओं की टोकरी को प्रभावित कर रही है।
महंगाई और भू-राजनीतिक कारक
आम तौर पर सोने को महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन मौजूदा आर्थिक माहौल इस धारणा को चुनौती दे रहा है। हालांकि महंगाई फेडरल रिजर्व के 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है, लेकिन निवेशकों का पूरा ध्यान अब मौद्रिक नीति पर केंद्रित है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों जैसे भू-राजनीतिक तनाव ने भी अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। जबकि भू-राजनीतिक तनाव आमतौर पर सोने को सहारा देता है, लेकिन फेड की ब्याज़ दरों का प्रभाव फिलहाल हावी है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था कैसा प्रदर्शन करती है। आने वाले आर्थिक आंकड़े, विशेष रूप से ADP रोज़गार के आंकड़े और नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर नज़र रखनी होगी। ये रिपोर्टें अमेरिकी रोज़गार बाज़ार की मजबूती का संकेत देती हैं। यदि अर्थव्यवस्था में मज़बूती के संकेत मिलते हैं, तो फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज़ दरों में और वृद्धि की जा सकती है, जिससे सोने और अन्य कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
