Gold Price: सुरक्षित निवेश का 'चमक' खो रहा सोना, जानिए क्यों निवेशकों ने मोड़ा मुंह

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Gold Price: सुरक्षित निवेश का 'चमक' खो रहा सोना, जानिए क्यों निवेशकों ने मोड़ा मुंह

2026 में सोने की चाल सुस्त पड़ गई है। रियल यील्ड्स (Real Yields) में बढ़ोतरी और निवेशकों के अन्य उत्पादक एसेट्स की ओर झुकाव के कारण गोल्ड एक कठिन दौर से गुजर रहा है। भारत में भी खुदरा मांग **6 साल** के निचले स्तर पर है।

गोल्ड की चमक क्यों हुई कम?

साल 2026 की शुरुआत में सोना $5,595 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर था, लेकिन नवंबर आते-आते यह गिरकर $4,000 प्रति औंस के नीचे ट्रेड कर रहा है। सोने का जो पारंपरिक 'सेफ-हेवन' (Safe-haven) का दर्जा था, उस पर अब सवाल उठने लगे हैं। दुनिया भर में पूंजी अब ऐसे एसेट्स की ओर जा रही है, जहां फिक्स्ड इनकम या रिटर्न की गुंजाइश है।

क्यों बढ़ रहा है 'अपॉर्चुनिटी कॉस्ट'?

आज के आर्थिक माहौल में US 10-year TIPS की यील्ड 3% के आसपास बनी हुई है। निवेशक अब बिना किसी रिटर्न वाले सोने के बजाय सरकारी बॉन्ड जैसे यील्ड-बेयरिंग इंस्ट्रूमेंट्स को तरजीह दे रहे हैं। बड़ी कंपनियां और सरकारें बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए पूंजी जुटा रही हैं, जिससे गोल्ड निवेश की दौड़ में पीछे छूट रहा है।

भारत में घट रही मांग

भारतीय बाजार में सोने की फिजिकल डिमांड 6 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। इसकी दो बड़ी वजहें हैं—पहला, सोने की ऊंची कीमतें और दूसरा, कमजोर मानसून। ग्रामीण भारत में मांग का न होना भी एक बड़ा कारण है। अब निवेशक फिजिकल सोने के बजाय ETFs जैसे फाइनेंशियल विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

सेंट्रल बैंकों का सहारा

बाजार में एक सपोर्ट लेवल अभी भी बना हुआ है, और वह है सेंट्रल बैंकों की खरीदारी। साल 2026 की तीसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों ने 321 टन सोने की नेट खरीदारी की है। हालांकि, यह खरीदारी बाजार को और गिरने से तो बचा रही है, लेकिन जब तक ग्लोबल रियल इंटरेस्ट रेट्स में गिरावट नहीं आती, सोने में फिर से कोई बड़ी तेजी की उम्मीद कम है। अब निवेशकों की नजरें कॉपर और यूरेनियम जैसे कमोडिटी सेक्टर पर टिकी हैं जो भविष्य में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.