सोने की 'सेफ हेवन' (Safe Haven) के तौर पर पहचान आजकल थोड़ी मुश्किल में है। एक तरफ दुनिया भर का बढ़ता कर्ज (Global Debt) सोने के भावों को ऊपर ले जाने का दम रखता है, तो वहीं दूसरी तरफ जियो-पॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) के कारण बाजार की चाल और पेचीदा हो गई है। निवेशक ऐसे माहौल में हैं जहां मॉनेटरी पॉलिसी और महंगाई (Inflation) की चिंताएं, जियो-पॉलिटिकल जोखिमों से ज्यादा हावी दिख रही हैं।
फरवरी 2026 में ईरान पर हुए हमलों के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव आया, लेकिन सोने की प्रतिक्रिया उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। शुरुआती उछाल के बाद, मार्च में कीमतें 13% तक गिरीं और फिर कुछ संभलीं। इतिहास बताता है कि संकट के शुरुआती दौर में लिक्विडिटी की जरूरत, बढ़ती ब्याज दरें और डॉलर की मजबूती सोने की कीमतों को तेजी से गिरा सकती है, जैसा कि 2008 और 2020 में देखा गया।
लंबे समय के लिहाज से सोने को मजबूती मिलने के पीछे सबसे बड़ा कारण लगातार बढ़ता ग्लोबल कर्ज है, जो 2025 के अंत तक $348 ट्रिलियन को पार कर गया। अनुमान है कि 2026 में सरकारें और कंपनियां $29 ट्रिलियन का और कर्ज लेंगी, जो 2024 से 17% ज्यादा है। अमेरिकी डॉलर पर भी दबाव रहने का अनुमान है, जिससे यह दूसरी तिमाही 2026 तक 94 तक गिर सकता है। एक कमजोर डॉलर ऐतिहासिक रूप से सोने की कीमतों को सहारा देता है।
दूसरी ओर, चांदी (Silver) की कहानी बिल्कुल अलग है। एनर्जी ट्रांजिशन (Energy Transition) के लिए इसकी इंडस्ट्रियल मांग, खासकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और डेटा सेंटरों से, बहुत मजबूत है। इसी वजह से चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। मार्च 2026 में यह $85.22 और जनवरी 2026 में $121.64 के ऑल-टाइम हाई पर थी। साल-दर-साल चांदी में 137.47% का शानदार उछाल देखने को मिला है। विश्लेषक उम्मीद कर रहे हैं कि यह तेजी जारी रहेगी। मौजूदा तिमाही के अंत तक चांदी $76.47 और 12 महीने में $88.49 तक पहुंच सकती है। iShares Silver Trust ETF (SLV) की मार्केट कैप $38.46 बिलियन है।
भले ही ग्लोबल महंगाई (Inflation) के कम होने की उम्मीद है, लेकिन अमेरिकी महंगाई 4% के पार जा सकती है। ऐसे में टैरिफ, फिस्कल डेफिसिट और टाइट लेबर मार्केट जैसी मुश्किलें बनी रहेंगी। इसके अलावा, पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष ने कच्चे माल के आयात को प्रभावित किया है, जिससे लागत बढ़ गई है और भारत के एल्यूमीनियम उद्योग जैसे कई उद्योगों में उत्पादन 40-50% तक कम हो गया है।
वॉल स्ट्रीट की कई फर्मों का मानना है कि 2026 के अंत तक सोना $6,000 प्रति औंस या उससे भी ऊपर जा सकता है। JPMorgan ने $6,300, UBS ने $6,200, और Goldman Sachs ने $5,400 का टारगेट दिया है। कुछ एक्सपर्ट्स का तो यह भी मानना है कि दशक के अंत तक सोना $10,000 तक पहुंच सकता है। हालांकि, इन उम्मीदों के बीच कुछ जोखिम भी हैं। अमेरिकी महंगाई का उम्मीद से ज्यादा बढ़ना और लंबी अवधि तक ऊंची ब्याज दरें बने रहना, या फिर ग्लोबल कर्ज का भारी बोझ सिस्टम में वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।