आउटलुक: सोने की कीमतों में और तेज़ी की उम्मीद
विश्लेषकों का मानना है कि सोने का यह तेज़ी का रुझान (upward trend) जारी रह सकता है। COMEX गोल्ड $5,500 से $6,000 के लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है, वहीं MCX फ्यूचर्स अगले 12 महीनों में ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकते हैं। साल 2026 के अंत तक कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। केंद्रीय बैंकों और निवेशकों की लगातार मांग (585 टन तिमाही) इस तेज़ी को सपोर्ट कर रही है, जो बाज़ार में मज़बूती का संकेत है।
क्यों बढ़ रही है सोने की मांग?
इस ज़बरदस्त मांग की मुख्य वजहें हैं केंद्रीय बैंकों की ओर से भारी खरीदारी (जो सालाना 700-900 टन तक हो सकती है), पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical instability) जिसने सोने को एक सुरक्षित निवेश (safe haven) बनाया है, और अमेरिकी डॉलर का लगातार कमजोर होना। निवेशक ग्लोबल डेट की चिंता और शेयर बाज़ार व बॉन्ड की अस्थिरता से बचने के लिए सोने की ओर रुख कर रहे हैं। साथ ही, सोने की माइनिंग में कमी भी सप्लाई-डिमांड के गैप को बढ़ा रही है, जिससे कीमतों को और बल मिल रहा है।
जोखिम और निवेशकों के लिए सलाह
हालांकि, कुछ जोखिम भी हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है। अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (U.S. Federal Reserve) ब्याज दरें बढ़ाता है, तो डॉलर मज़बूत हो सकता है और सोने की चमक फीकी पड़ सकती है। चल रहे संघर्षों का समाधान भी कीमतों से 'फियर प्रीमियम' को कम कर सकता है। भारत में 15% इंपोर्ट ड्यूटी लगने से फिजिकल डिमांड कम हुई है, जिससे डोमेस्टिक प्रीमियम बढ़ा है। ऐसे में खरीदार डिजिटल गोल्ड और ETFs की ओर जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स मौजूदा हाई सेंटीमेंट और संभावित गिरावट को देखते हुए एक साथ बड़ी रकम लगाने से बचने की सलाह दे रहे हैं। लॉन्ग-टर्म स्थिरता के लिए पोर्टफोलियो का 10-15% सोने में निवेश करना, और वह भी किश्तों में (staggered investment strategy), सबसे अच्छी रणनीति मानी जा रही है।