दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज सोने के भाव में ₹400 की बढ़त देखी गई, जिससे यह ₹1,48,500 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतों में ₹5,000 का जोरदार उछाल आया और यह ₹2,37,000 प्रति किलोग्राम हो गई। घरेलू कीमतों में यह वृद्धि वैल्यू बाइंग और डॉलर के कमजोर होने से हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में मामूली गिरावट आई।
दिल्ली में सोने-चांदी की चमक बढ़ी
दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को कीमती धातुओं में जोरदार तेजी देखने को मिली। सोने के दाम ₹400 बढ़कर ₹1,48,500 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गए। वहीं, चांदी की कीमतों में ₹5,000 की भारी उछाल दर्ज की गई, जिससे यह ₹2,37,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। भारत में कीमतों में यह उछाल अंतरराष्ट्रीय रुझानों के विपरीत है, जहां सोना थोड़ा नरम हुआ था।
कीमती धातुओं में तेजी के मुख्य कारण
घरेलू बाजार में कीमतों में यह वृद्धि मुख्य रूप से दो वजहों से हुई है: वैल्यू बाइंग (Value Buying) और करेंसी में उतार-चढ़ाव। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेडर्स ने कम कीमतों का फायदा उठाते हुए खरीदारी बढ़ाई है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से सोना और चांदी खरीदारों के लिए अधिक आकर्षक हो गए हैं। डॉलर इंडेक्स में लगातार तीन सत्रों से गिरावट आई है, जिसने भारतीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दिया है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अंतर
जहां भारतीय बाजार में तेजी देखी गई, वहीं अंतरराष्ट्रीय कीमतें अलग राह पर रहीं। स्पॉट गोल्ड $17.57 यानी 0.43% गिरकर $4,106.25 प्रति औंस पर बंद हुआ। चांदी भी वैश्विक स्तर पर लगभग 1% गिरकर $59.54 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यह अंतर दर्शाता है कि कैसे घरेलू मांग और विशिष्ट मुद्रा आंदोलनों जैसे कारक अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों की तुलना में कीमती धातुओं की कीमतों के लिए कभी-कभी अलग परिणाम दे सकते हैं।
आगे क्या?
विश्लेषक अब आगामी आर्थिक आंकड़ों पर नजर गड़ाए हुए हैं, जो भविष्य में धातु की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। अगले हफ्ते जारी होने वाला अमेरिका का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा बाजार सहभागियों के लिए एक प्रमुख फोकस है। मुद्रास्फीति पर यह रिपोर्ट फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर रुख के बारे में सुराग दे सकती है। चूंकि सोना एक गैर-ब्याज-भुगतान वाली संपत्ति है, ब्याज दर नीतियों में बदलाव अक्सर निवेशकों के लिए इसकी अपील को सीधे प्रभावित करते हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे राजनयिक घटनाक्रमों पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि इस तरह के भू-राजनीतिक बदलाव वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की स्थिरता और मांग को प्रभावित कर सकते हैं।
