25 सितंबर को सोने की कीमतों में तेजी का रुख रहा। घरेलू बाजार में MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स **₹1,50,841** प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए, जिसकी मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर निवेशकों का इंतजार है।
बाजार की चाल और यूएस फेड का कनेक्शन
25 सितंबर को सोने की कीमतों में शुरुआती कारोबार से ही तेजी देखी गई। स्पॉट गोल्ड $4,294 प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि घरेलू मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर फ्यूचर्स 0.09% की बढ़त के साथ ₹1,50,841 प्रति 10 ग्राम पर सेटल हुआ। सोने में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी ब्याज दरें हैं। सोना एक ऐसी एसेट है जिस पर ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक बॉन्ड्स की ओर रुख करते हैं। लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा दरें घटाने की उम्मीद में सोने की मांग बढ़ जाती है।
फिलहाल मार्केट एक्सपर्ट्स अमेरिकी लेबर मार्केट के डेटा पर पैनी नजर रखे हुए हैं। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत मिलते हैं, तो केंद्रीय बैंक अपनी नीतियों में ढील दे सकता है, जो सोने की कीमतों को और सपोर्ट देगा। वहीं, अगर डेटा उम्मीद से बेहतर रहा, तो मुनाफावसूली के कारण भाव $4,200 के स्तर तक फिसल सकते हैं।
सिल्वर और अन्य जोखिम
इस दौरान चांदी की कीमतों में भी तेजी देखी गई और यह ₹2,34,030 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक अनिश्चितता और खाड़ी देशों में भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोने को एक सुरक्षित निवेश (safe-haven) माना जा रहा है, हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव (volatility) अब भी अधिक है। भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए सलाह है कि बढ़ते दामों का असर फिजिकल ज्वेलरी की डिमांड पर पड़ सकता है, इसलिए निवेश से पहले अमेरिकी आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए रखें।
