Gold Reserve Dominance: क्या यह असलियत है या सिर्फ दिखावा?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold Reserve Dominance: क्या यह असलियत है या सिर्फ दिखावा?
Overview

खबरों में भले ही कहा जा रहा हो कि सोने (Gold) ने अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasuries) को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन यह असल में कीमत बढ़ने का नतीजा है, न कि डॉलर-आधारित कर्ज की बड़ी बिकवाली का। फिर भी, भू-राजनीतिक बचाव के लिए सेंट्रल बैंक सोने की खरीदारी बढ़ा रहे हैं।

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मूल्यांकन का भ्रम (The Valuation Illusion)

हाल ही में सोने के भाव में आई जबरदस्त तेजी के कारण वैश्विक आधिकारिक रिजर्व में इसका हिस्सा बढ़कर 27% हो गया है, जो अमेरिकी ट्रेजरी के 22% से ज्यादा है। लेकिन, सेंट्रल बैंकों के अकाउंटिंग के तरीके को समझने वालों के लिए इसमें एक खास बात छिपी है। अगर 2024 और 2025 के अंत में कीमतों के हिसाब से देखा जाए, तो पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव नजर नहीं आता। अगर होल्डिंग्स का मूल्यांकन 2023 के अंत के स्तर पर किया जाए, तो अमेरिकी ट्रेजरी की हिस्सेदारी 26% बनी रहेगी, जबकि सोना और यूरो दोनों 16% पर बराबरी पर होंगे। ऐसे में, सोने के रिजर्व में इतना बड़ा उछाल असल में इसकी अपनी कीमत बढ़ने का नतीजा है, न कि बड़े पैमाने पर बिकवाली का।

खरीदारी के व्यवहार में रणनीतिक बदलाव (The Strategic Shift in Buying Behavior)

कीमतों के इस पहलू को नजरअंदाज भी कर दें, तो भी सोने की मांग में एक बड़ा बदलाव आया है। सेंट्रल बैंक अब सोने को सिर्फ एक वैल्यू स्टोर (store of value) की जगह एक रणनीतिक, नॉन-काउंटरपार्टी एसेट (non-counterparty asset) के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। 2025 में शुद्ध वार्षिक खरीद पिछले तीन सालों के 1,000+ टन के मुकाबले घटकर 850 टन रह गई, लेकिन फिर भी इसकी मांग ऐतिहासिक रूप से असामान्य बनी हुई है। ग्वाटेमाला, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे नए देशों के साथ-साथ चीन, पोलैंड और भारत जैसे पारंपरिक खरीदार भी इसमें शामिल हैं। इससे पता चलता है कि डाइवर्सिफिकेशन (diversification) की चाहत अब कुछ खास देशों तक सीमित नहीं रही। यह खरीदारी बाजार के समय को देखकर नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा होल्डिंग्स के संभावित हथियार बनने से अपने सॉवरेन बैलेंस शीट को बचाने के लिए की जा रही है।

संरचनात्मक कमजोरियां और जोखिम (Structural Vulnerabilities and Risks)

ECB (यूरोपीय सेंट्रल बैंक) के नेतृत्व सहित सोने के बढ़ते चलन के आलोचक कहते हैं कि सोने में प्रमुख फिएट मुद्राओं (fiat currencies) जैसी कोई व्यावहारिक उपयोगिता नहीं है। सोने पर कोई यील्ड (yield) नहीं मिलता, इसे रखने में खर्च आता है, और इसकी सप्लाई सीमित है। यह इंटरनेशनल लिक्विडिटी (liquidity) के संकटों को प्रबंधित करने के लिए एक बोझिल साधन है। इसके अलावा, इस ट्रेंड की अस्थिरता तब दिखती है जब सेंट्रल बैंक तीव्र वित्तीय तनाव का सामना करते हैं। 2026 की शुरुआत में तुर्की द्वारा 130 टन सोना बेचना या गिरवी रखना यह दिखाता है कि जब राष्ट्रीय मुद्रा संकट में होती है, तो लंबी अवधि के रणनीतिक लक्ष्यों के बावजूद, सोने के रिजर्व अक्सर तरलता का पहला स्रोत बनते हैं। ट्रेजरी के विपरीत, जिन्हें आसानी से डॉलर जुटाने के लिए बेचा या रेपो मार्केट (repo markets) में इस्तेमाल किया जा सकता है, फिजिकल गोल्ड एक कठोर संपत्ति है जिसे महत्वपूर्ण लागत या बाजार प्रभाव के बिना जुटाना मुश्किल हो सकता है।

रिजर्व मैनेजमेंट का भविष्य (The Outlook for Reserve Management)

आगे चलकर, डॉलर के दुनिया की मुख्य इनवॉइसिंग करेंसी (invoicing currency) का दर्जा खोने की संभावना कम है, फिर भी रिजर्व की संरचना बहु-ध्रुवीय ढांचे (multi-polar framework) की ओर बढ़ने की उम्मीद है। संस्थागत निवेशकों को यह उम्मीद करनी चाहिए कि सेंट्रल बैंक सोने के marginal खरीदार बने रहेंगे, खासकर अगर अमेरिकी वित्तीय स्थिरता (US fiscal sustainability) एक चिंता का विषय बनी रहती है। फोकस होल्डिंग्स के कुल मूल्य से हटकर 'विश्वास प्रीमियम' (trust premium) पर स्थानांतरित होने की संभावना है, जहां सोना डॉलर-आधारित वित्तीय ढांचे के प्रत्यक्ष प्रतिस्थापन के बजाय एक खंडित भू-राजनीतिक भविष्य के खिलाफ एक स्थायी बीमा पॉलिसी के रूप में कार्य करता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.