केविन वॉर्श के नॉमिनेशन से आई सुनामी!
पिछले दिनों गोल्ड (Gold) की कीमतों में जबरदस्त गिरावट आई थी, जो पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय में सबसे तेज एकदिनी बिकवाली थी। यह गिरावट मुख्य रूप से केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के चेयरमैन पद के लिए नॉमिनेट होने की खबर से शुरू हुई। वॉर्श की सख्त मौद्रिक नीति (monetary policy) की ओर झुकाव वाली छवि के कारण, बाजार को उम्मीद थी कि ब्याज दरें बढ़ेंगी और यूएस डॉलर (U.S. Dollar) मजबूत होगा, जिसने कीमती धातु पर दबाव बढ़ा दिया।
जनवरी के आखिर में जब स्पॉट गोल्ड की कीमतें करीब $5,600 प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई (all-time high) के पास थीं, तभी यह बिकवाली शुरू हुई। प्रॉफिट-बुकिंग, घटती लिक्विडिटी (liquidity) और फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स (futures contracts) पर मार्जिन रिक्वायरमेंट्स (margin requirements) के बढ़ने से कीमतें $4,800 के स्तर से भी नीचे चली गईं। हालांकि, 3 फरवरी 2026 तक गोल्ड की कीमतों में रिकवरी आई और यह करीब $4,927 प्रति औंस पर ट्रेड करने लगा।
UBS का बुल मार्केट पर भरोसा बरकरार!
इस बड़ी गिरावट के बावजूद, ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस UBS (UBS) ने गोल्ड के लिए अपना बुलिश आउटलुक (bullish outlook) बरकरार रखा है और इसे 'Attractive' रेटिंग दी है। UBS के एनालिस्ट्स का मानना है कि मौजूदा गिरावट गोल्ड के बुल मार्केट (bull market) का अंत नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे संकेत नहीं हैं जो आमतौर पर गोल्ड के बुल मार्केट के खत्म होने की ओर इशारा करते हैं, जैसे कि लगातार ऊंची रियल इंटरेस्ट रेट्स (real interest rates) या स्ट्रॉन्ग यूएस डॉलर (strong U.S. Dollar)।
UBS का मानना है कि हम अभी भी गोल्ड के अपट्रेंड (uptrend) के मिड-टू-लेट स्टेज (mid-to-late stage) में हैं, जहां बड़े उतार-चढ़ाव के साथ 5% से 8% तक की गिरावटें आती रहती हैं। UBS ने मिड-2026 तक गोल्ड का टारगेट प्राइस $6,200 प्रति औंस रखा है।
डिमांड का मजबूत सपोर्ट!
इस बुलिश आउटलुक के पीछे कई मजबूत डिमांड ड्राइवर्स (demand drivers) हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में गोल्ड की कुल डिमांड 5,000 टन के पार निकल गई, जो मुख्य रूप से इन्वेस्टमेंट (investment) से आई। सेंट्रल बैंक (Central Banks) भी रिजर्व डायवर्सिफिकेशन (reserve diversification) के तहत सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। 2025 में उन्होंने करीब 863 टन सोना खरीदा, और J.P. Morgan का अनुमान है कि 2026 में भी वे 800 टन सोना खरीद सकते हैं।
लगातार जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं (geopolitical uncertainty) भी गोल्ड को एक सुरक्षित निवेश (safe haven) के तौर पर सपोर्ट कर रही हैं। J.P. Morgan ने भी 2026 के अंत तक गोल्ड का टारगेट प्राइस बढ़ाकर $6,300 प्रति औंस कर दिया है।
निकट भविष्य और लंबी अवधि का नज़रिया
निकट भविष्य में, UBS को उम्मीद है कि गोल्ड की कीमतें $4,500 और $4,800 प्रति औंस के बीच कंसॉलिडेट (consolidate) होंगी। इसमें COMEX गोल्ड फ्यूचर्स (COMEX Gold Futures) पर मार्जिन में बढ़ोतरी (6% से 8%) का असर दिखेगा।
हालांकि, लंबी अवधि में, सेंट्रल बैंक की खरीद, ETF इनफ्लो (ETF inflows) और फिजिकल गोल्ड (physical gold) की डिमांड में मजबूती, गिरती यूएस रियल इंटरेस्ट रेट्स और भू-राजनीतिक तनाव जैसे फैक्टर्स गोल्ड की कीमतों को ऊपर ले जाएंगे। पिछले एक साल में यूएस डॉलर इंडेक्स (U.S. Dollar Index - DXY) करीब 9.75% कमजोर हुआ है, जिससे गोल्ड को सपोर्ट मिल रहा है, और यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है। UBS अपने ग्लोबल एसेट एलोकेशन (global asset allocation) में गोल्ड को एक महत्वपूर्ण लॉन्ग-टर्म पोर्टफोलियो हेज (long-term portfolio hedge) के तौर पर देख रहा है।